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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 28

शुभाशुभप्रकरण १९
आठवाँ, नवाँ, दशवाँ, चौदहवाँ मुहूर्त्त; बृहस्पति को दूसरा, छठा, बारहवाँ,
चौदहवाँ, पन्द्रहवाँ, सोलहवाँ मुहूर्त्त; शुक्रवार को चौथा, पाँचवाँ, छठा, नवाँ,
दशवाँ, बारहवाँ, चौदहवाँ मुहूर्त्त और शनैश्चर को पहिला, दूसरा, आठवाँ,
दशवाँ, गेरहवाँ, बारहवाँ मुहूर्त्त निन्दित होता है । इन्हीं मुहूर्त्तों में कोई
दुष्टक्षण, कोई कुलिक, कंटक, कालवेला, अर्द्धयाम और यमघण्ट होते हैं ।
दिनमान का सोलहवाँ भाग एक मुहूर्त्त है ॥ ३८-३९ ॥
वर्जित मुहूर्त्तों का चक्र
| रविवार | ६ | ७ | ८ | १० | १४ | | |
| सोमवार | ४ | ६ | ८ | ९ | १२ | १३ | १४ |
| मंगल | २ | ३ | ४ | ६ | १० | | |
| बुधवार | २ | ४ | ८ | ९ | १० | १४ | |
| बृहस्पति | २ | ६ | १२ | १४ | १५ | १६ | |
| शुक्रवार | ४ | ५ | ६ | ९ | १० | १२ | १४ |
| शनैश्चर | १ | २ | ८ | १० | ११ | १२ | |
देशभेद से होलाष्टक का निषेध
विपाशैरावतीतीरे शतद्रूवाश्च त्रिपुष्करे ।
विवाहादिशुभे नेष्टं होलिकाप्राग्दिनाष्टकम् ॥ ४० ॥
अन्वयः—विपाशैरावतीतीरे, शतद्रूवाः (तीरे) त्रिपुष्करे (देशे) विवाहादिशुभे
होलिकाप्राग्दिनाष्टकं नेष्टम् ॥ ४० ॥
विपाशा, इरावती और शतद्रु नदी के तट पर बसे हुए देशों में और
त्रिपुष्कर देश में विवाह आदि शुभ कार्यों में होलिकादहन से पूर्व आठ दिन
निषिद्ध हैं, अन्य देशों में नहीं ॥ ४० ॥
चन्द्रमा अनुकूल होने से दुष्ट योग भी शुभ होते हैं
मृत्युक्रकचदग्धादीनिन्दौ शस्ते शुभाञ्जगुः ।
केचिद्यामोत्तरं चान्ये यात्रायामेव निन्दितान् ॥ ४१ ॥
अन्वयः—इन्दौ शस्ते मृत्युक्रकचदग्धादीन् (योगान्) शुभान् जगुः । केचित्
यामोत्तरं (शुभान् जगुः) । अन्ये यात्रायामेव निन्दितान् जगुः ॥ ४१ ॥
कोई आचार्य चन्द्रमा के शुभ रहते मृत्यु योग, क्रकचयोग, दग्धयोग,
विषाख्य और हुताशनाख्य योग को शुभ कहते हैं, और कोई कहते हैं कि
एक पहर के बाद ये सब योग शुभ होते हैं । कोई तो कहते हैं कि ये यात्रा
में ही निन्दित हैं ॥ ४१ ॥