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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 182

यात्राप्रकरण १७३
पन्थाराहुचक्र
| धर्ममार्ग | अ० | पु० | आश्ले० | वि० | अनु० | ध० | श० |
| अर्थमार्ग | भ० | पुन० | म० | स्वा० | ज्ये० | श्र० | पू०भा० |
| काममार्ग | कृ० | आ० | पू० फा० | चि० | मू० | अभि० | उ०भा० |
| मोक्षमार्ग | रो० | मृ० | उ० फा० | ह० | पू० फा० | उ०फा० | रे० |
पन्थाराहुचक्रफल
धर्मगे भास्करे वित्तमोक्षे शशी वित्तगे धर्ममोक्षस्थितिः शस्यते ।
कामगे धर्ममोक्षार्थगः शोभनो मोक्षगे केवलं धर्मगः प्रोच्यते ॥ १९ ॥
अन्वयः—धर्मगे भास्करे, वित्तमोक्षे शशी शस्यते; वित्तगे भास्करे, धर्ममोक्ष-
स्थितः शशी; कामगे भास्करे, धर्ममोक्षार्थगः शशी शोभनः; मोक्षगे भास्करे, केवलं
धर्मगः शशी शोभनः प्रोच्यते ॥ १९ ॥
धर्ममार्ग में सूर्य हो और अर्थमार्ग या मोक्षमार्ग में चन्द्रमा हो तो शुभ
है, तथा अर्थमार्ग में सूर्य और धर्ममार्ग या मोक्षमार्ग में चन्द्रमा हो तो शुभ
है, तथा काममार्ग में सूर्य और धर्ममार्ग या मोक्षमार्ग या अर्थमार्ग में चन्द्रमा
हो तो शुभ है, तथा मोक्षमार्ग में सूर्य और धर्ममार्ग में चन्द्रमा हो तो शुभ है,
और इससे विपरीत अशुभ है ॥ १९ ॥
पौषादि मासों की परीवादि तिथियों में पूर्वादि दिशाओं
की यात्रा का शुभाशुभ फल
पौषे पक्षत्यादिका द्वादशैकं तिथ्यो माघादौ द्वितीयादिकास्ताः ।
कामात्तिस्रः स्युस्तृतीयादिवच्च याने प्राच्यादौ फलं तत्र वक्ष्ये ॥ २० ॥
सौख्यं क्लेशो भीतिरर्थागमश्च शून्यं नैस्वं निस्स्वता मिश्रता च ।
द्रव्यक्लेशो दुःखमिष्टाप्तिरर्थो लाभः सौख्यं मङ्गलं वित्तलाभः ॥ २१ ॥
लाभो द्रव्याप्तिर्धनं सौख्यमुक्तं भीतिर्लाभो मृत्युरर्थागमश्च ।
लाभः कष्टं द्रव्यलाभः सुखं च कष्टं सौख्यं क्लेशलाभः सुखं च ॥ २२ ॥
सौख्यं लाभः कार्यसिद्धिश्च कष्टं क्लेशः कष्टात्सिद्धिरर्थो धनं च ।
मृत्युर्लाभो द्रव्यलाभश्च शून्यं शून्यं सौख्यं मृत्युरत्यन्तकष्टम् ॥ २३ ॥