मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६८ मुहूर्तचिन्तामणि
छठि, द्वादशी, अष्टमी, शुक्लपक्ष की परीवा, पूर्णमासी, अमावास्या,
चौथि, नवमी, चतुर्दशी ये तिथियाँ यात्रा में शुभ नहीं हैं, अर्थात् इन तिथियों
में यात्रा न करे, इनको छोड़कर अन्य तिथियों में यात्रा करे; और अश्विनी,
पुनर्वसु, अनुराधा, मृगशिरा, पुष्य, रेवती, हस्त, श्रवण, धनिष्ठा, इन नक्षत्रों
में की हुई यात्रा शुभ होती है ॥ ९ ॥
वारशूल और नक्षत्रशूल
न पूर्वदिशि शक्रभे न विधुसौरिवारे तथा
न चाजपदभ गुरौ यमदिशीनदैत्येज्ययोः ।
न पाशिदिशि धातृभे कुजबुधेऽर्यमर्क्षे तथा
न सौम्यककुभि व्रजेत्स्वजयजीवितार्थी बुधः ॥ १० ॥
अन्वयः—स्वजयजीवितार्थी बुधः पूर्वदिशि शक्रभे न, तथा विधुसौरिवारे न
व्रजेत् । च अजपदभे, गुरौ (दिने) यमदिशि न व्रजेत् । इनदैत्येज्ययोः धातृभे पाशिदिशि
न व्रजेत् तथा कुजबुधे अर्यमर्क्षे सौम्यककुभि न व्रजेत् ॥ १० ॥
धन, विजय और जीवन चाहनेवाला बुद्धिमान् मनुष्य ज्येष्ठा नक्षत्र में
तथा सोमवार और शनैश्चर के दिन पूर्व दिशा में, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में
तथा बृहस्पति के दिन दक्षिण दिशा में, रोहिणी नक्षत्र में तथा रविवार
और शुक्र के दिन पश्चिम दिशा में और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में तथा मंगल,
बुध के दिन उत्तर दिशा में यात्रा न करे ॥ १० ॥
कालविशेष में विशेष नक्षत्रों का निषेध
पूर्वाह्णे ध्रुवमिश्रभैर्न नृपतेर्यात्रा न मध्याह्नके
तीक्ष्णाख्यैरपराह्नके न लघुभैर्नो पूर्वरात्रे तथा ।
मित्राख्यैर्न च मध्यरात्रिसमये चोग्रैस्तथा नो चरै
रात्र्यन्ते हरिहस्तपुष्यशशिभिः स्यात्सर्वकाले शुभा ॥ ११ ॥
अन्वयः—पूर्वाह्णे ध्रुवमिश्रभैः नृपतेः यात्रा न शुभा, मध्याह्नके तीक्ष्णाख्यैः न
शुभा, अपराह्नके लघुभैः न, तथा मित्राख्यैः पूर्वरात्रे न, तथा च उग्रैः मध्यरात्रिसमये
न, तथा चरैः रात्र्यन्ते न (शुभा भवति) । हरिहस्तपुष्यशशिभिः सर्वकाले नृपतेः यात्रा
शुभा स्यात् ॥ ११ ॥
दिन के तीन भाग करके पहिले भाग में तीनों उत्तरा, रोहिणी, विशाखा
और कृत्तिका में; दूसरे भाग में मूल, ज्येष्ठा, आर्द्रा और श्लेषा में; तीसरे