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सर्वकोश
मृगेन्द्र आगम: विद्या एवं योग पाद (भट्ट नारायणकण्ठ वृत्ति सहित प्राचीनतम कामिक आगम परिशिष्ट)

मृगेन्द्र आगम: विद्या एवं योग पाद (भट्ट नारायणकण्ठ वृत्ति सहित प्राचीनतम कामिक आगम परिशिष्ट)

Mrigendra Tantra / Agama with Narayanakantha Vritti

महर्षि मृगेन्द्र (टीकाकार: भट्ट नारायणकण्ठ) द्वारा

DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ

पृष्ठ 192, कुल 448 में से

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पृष्ठ 192

)-> wait, is that(१।२।७)`?

  • Yes, (१।२।७).
  • L14: इत्यादिभिर्वाक्यैरनुसन्धेयः ।
  • L15: अथाविद्यादयः पाशाः
  • L16: कथ्यन्ते लेशतोऽधुना ।
  • L17: येषामपाये पतयो
  • L18: भवन्ति जगतोऽणवः ॥ १ ॥
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Everything looks solid and precise.अथ
श्रीमृगेन्द्रतन्त्रे ।
विद्यापादे ।
( सप्तमः पटलः )
‘........................शिवः ।
पूर्वन्व्यत्यासितस्याणोः पाशजालमपोहति ॥’ (१।२।१)
इति मूलसूत्रोपात्ता