मृगेन्द्र आगम: विद्या एवं योग पाद (भट्ट नारायणकण्ठ वृत्ति सहित प्राचीनतम कामिक आगम परिशिष्ट)

मृगेन्द्र आगम: विद्या एवं योग पाद (भट्ट नारायणकण्ठ वृत्ति सहित प्राचीनतम कामिक आगम परिशिष्ट)
Mrigendra Tantra / Agama with Narayanakantha Vritti
महर्षि मृगेन्द्र (टीकाकार: भट्ट नारायणकण्ठ) द्वारा
DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ
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(१।२।७). - L14:
इत्यादिभिर्वाक्यैरनुसन्धेयः । - L15:
अथाविद्यादयः पाशाः - L16:
कथ्यन्ते लेशतोऽधुना । - L17:
येषामपाये पतयो - L18:
भवन्ति जगतोऽणवः ॥ १ ॥
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श्रीमृगेन्द्रतन्त्रे ।
विद्यापादे ।
( सप्तमः पटलः )
‘........................शिवः ।
पूर्वन्व्यत्यासितस्याणोः पाशजालमपोहति ॥’ (१।२।१)
इति मूलसूत्रोपात्ता