सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 345, कुल 760 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 345

२५८ मृच्छकटिकम्

बसन्तसेना—कधं एसो वि सन्तप्पदि ज्जेव। ता अजाणन्तेण एदिणा एव्वं अणुचिट्ठिदं। (कथमेषोऽपि सन्तप्यते एव। तदजानता एतेन एवमनुष्ठितम्।)
शर्विलकः—मदनिके ! किमिदानीं युक्तम् ?
मदनिका—इत्थं तुमं ज्जेव पण्डिओ। ( अत्र त्वमेव पण्डितः । )
शर्विलकः—नैवम्। पश्य—

स्त्रियो हि नाम खल्वेता निसर्गादेव पण्डिताः।
पुरुषाणान्तु पाण्डित्यं शास्त्रैरेवोपदिष्यते ॥ १९ ॥


है, इसके द्वारा कामाग्नि से सन्तप्त शर्विलक का मदनिकाप्राप्ति के लिये आश्रित वसन्तसेना के धरोहर के गहनों का चुरा लेना—इस प्रस्तुत का ज्ञान होने से अप्रस्तुतप्रशंसा अलंकार है। इसके माध्यम से मदनिका को न पा सकना द्योतित कर रहा है। पथ्यावक्त्र छन्द है ॥ १८ ॥

**अर्थ—वसन्तसेना—**क्या, यह भी दुःखी हो रहा है ? तो निश्चित ही इसने अनजान में चोरी की है।

**शर्विलकः—**अब क्या करना ठीक होगा ?

**मदनिका—**इस विषय में तो तुम्हीं चतुर हो।

**शर्विलक—**ऐसा नहीं। देखो—

**अन्वयः—**एताः, स्त्रियः, हि, निसर्गात्, एव, पण्डिताः, खलु, नाम, तु, पुरुषाणाम्, पाण्डित्यम्, शास्त्रैः, एव, उपदिश्यते ॥ १९ ॥

**शब्दार्थ—**एताः=ये, स्त्रियः=स्त्रियाँ, हि=निश्चय ही, निसर्गात्=प्रकृति से, एव=ही, पण्डिताः=चतुर, ( होती हैं ), खलु नाम=ऐसा माना जाता है। तु=किन्तु, पुरुषाणाम् = मनुष्यों का, पाण्डित्यम्=चातुर्य, शास्त्रैः=शास्त्रों के द्वारा, एव=ही उपदिश्यते=उपदिष्ट होता है, सिखाया जाता है ॥ १९ ॥

**अर्थ—**ये स्त्रियाँ जन्म से ही अथवा स्वभाव से ही चतुर होती हैं। किन्तु पुरुषों की चतुरता तो शास्त्रों के द्वारा ही सिखाई जाती है । ( अर्थात् स्त्रियां बिना सिखाये ही चतुर होती हैं परन्तु पुरुष सिखाये जाने के बाद ही चतुर हो पाते हैं ) ॥ १९ ॥

**टीका—**उपस्थितसमस्यायां मदनिकाया एवोपायनिर्धारकत्वं व्यवस्थापयितु स्त्रीबुद्धेर्निसर्गसूक्ष्मत्वमाह—स्त्रिः इति। एताः=इमाः, स्त्रियः=नार्यः, निसर्गात्=स्वभावात्, जन्मतओ वा, एव, पण्डिताः = चतुराः, खलु नाम = सम्भावनायाम्, ताः पण्डिता इति सम्भावयामि, तु = परन्तु, पुरुषाणाम् = मनुष्याणाम्, पाण्डित्यम्=चातुर्यम्, शास्त्रैः=शास्त्रदर्शनैः, एव, उपदिश्यते=शिक्ष्यते, कथ्यते वा विद्वद्भिरिति शेषः। एवञ्च अत्र मदनिकाया एव निर्धारकत्वक्षमत्वमिति बोध्यम् ॥ १९ ॥