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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

३० मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह
“सरँग ओट तजे कुल अंकुस, बदन दिये मुसकाय ।”
उपर्युक्त पद मे आए ‘गिरिधरन लाल’ का प्रयोग विशेष
विचारणीय हे ।
५
नयन लागे तब घूँघट कैसो, लोक लाज तिनका ज्यूँ तोर्यो ।
नेकी बदी हूं सिर पर धारी, मन हाथी आंकुस दे मार्यो ।
प्रगट निसान बजाय चली, राणा राव सकल जग छोऱ्यो ।
मीराँ सबल धणी के सरणे, का भयो भूपति मुख मोर्यो ।।२८।।
पद की तृतीय पंक्ति विशेष महत्वपूर्ण ह। मीरा सिर्फ राणा
परिवार “श्वसुर कुल” का ही परित्याग नही कर रही हे, अपितु “राव
परिवार” “पितृ कुल” का भी त्याग कर रही हे। ऐसी ही अभिव्यक्ति
सघर्ष द्योतक एक और पद मै भी हे, जिसका प्रारम्भ होता हे “अब
नाहि बिसरू म्हारे हिरदे लिख्यो हरि नाम। ” सदेश वाहक द्वारा
लौट जाने का आग्रह किए जाने पर मीराँ का उत्तर है, “कर सूरापण¹
नीसरी, म्हारे कुण राणे कुण राव ।” इन दोनो ही पदो मे प्रयुक्त यह
“राव” शब्द विशेष विचारणीय है ।
इसी पंक्ति के पूर्वार्द्ध से व्यक्त होने वाली भावना “प्रगट निसान
बजाय चली” भी विरोधाभिव्यक्ति के राजस्थानी पद स० ५ म मिलती
हैं। माता के प्रति मीराँ का कथन “देर नगारो² मीराँ चढ़ गयी, माता
हियो मत हारी जी” यद्यपि मीराँ की दृढ भक्ति भावना अन्य पदों से भी
व्यक्त होती है, तथापि इस तरह की भावना अन्य पदों म नही मिलती ।
१ भीष्म प्रतिज्ञा, २ ताल ठोककर ।