मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७० मीरॉ-बृहद्-पद-संग्रह
३१
वृजमॉ नाव्या१ फरीने२ गोपीनो वांलो, व्रज माँ नाव्या फरीनो ।
गामने गोकुल यो मेली मथुरा पधारिया वांलो, जईवरिया कुब्जा कारीनो ।
सातरी दिवस हरि वादो करीने गयो छो, षटमास थमाछे हरी ने ।
सोलसे गोपी नो साथे रास रचे थे वांला, उमा मुख मुरली धरीने ।
बाई मीरॉ के प्रभु गिरधर ना गुन वाला, चरन कमल चित हरी ने ।
।।४८७।।†
३२
गगरिया बेडा ढलसे, उठानी मारी आप्णे, गागरिया बेडा ढलसे ।
साव सो नानी मारी, जड़ित्र उघानी वांला, सुने री तार मारो खड़से ।
कस तो दाय नो कुरु छे राज वांला, कस कहयू जू पडसे ।
जल रे जमुना ना वांला मोटो छे आरो रे, नित्य उठि नाहवॉ जाऊ परसे ।
बाई मीरॉ के प्रभु गिरिधर नागर वांला, गोपी नो स्वामी मुझने मलसे ।
।।४८८।।†
३३
वांला ना कान हेडा रे ओधव जी, एवा काल ना कठन हेडा रे ।
टीटू डीना इण्डा३ डगरिया मञ्जारी, ना राख्या दड्या रे ।
ग्रेह थी गजराज उगारियो, गोकुल मा चारी गइया रे ।
गोकुल सघन रेलतुँ राख्युँ, गोबरधन कर धरिया रे ।
मीरॉ गवे गिरधर ना गुन, मै तो तोरे लागूँ पड्या रे ।।४८९।।†
३४
उठानी मोरे आलो रे, गागरिया बेढा ढलसे ।
जल जमना भरूआ गयाँ ता, चीर खस्योने बेढु परसे ।
१ न + आव्या-नाव्या अर्थात् नही आये, २ लौटकर, ३ अण्डा ।