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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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पृष्ठ 319

२६६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
राधा नो कथ^१ कामण^२ गारो।
मीराँबाई के प्रभु गिरिधर ना गुण वा'ला, भव सागर थी^३ हमने तारो।
॥४७४॥†
१९
प्रेम नी प्रेम नी प्रेम नी रे, मन लागी कटारी प्रेम नी रे।
जल जमुना माँ भरवा गयाताँ, इती गागर माथे इमे नीरे।
काँचे ते ताँत न हरि जी पे बाँधी, जेम खेचे तेम नी रे।
'मीराँ' के प्रभु गिरधर नागर, साँवली सुरत सुभ एक नी रे॥४७५॥†
श्री विष्णु कुमारी 'मजु' ने उपर्युक्त पद को मीराँ कृत मानने मे
सन्देह प्रकट किया है। परन्तु "मीराबाई की शब्दावली" वेलवेडियर
प्रेस, प्रयाग मे लिखित होने के कारण इसमे उल्लिखित है।
२०
जागो रे अलबेला कान्हा, मोटा मुकुट धारी र।
सहु दुनिया तो सुती जागी, प्रभु तुम्हारी निद्रा भारी रे।
गोकुल गामिनी गायो छूटी, वनज करे व्यापारी रे।
दातन करो तमे आद देवा, मुख धुओ मुरारी रे।
भात भात ना भोजन निपाया^५, भरी सुवरण थीली रे।
लवँग सुपारी न एलची, प्रभु पाननी बीडी वाली रे।
प्रीत करी बाओ पुरुषोत्तम, अवडावे^६ ब्रजनी नारी रे।
कस नीत मे वस काढी, मासी पूतना मारी रे।
पताले जाई काली नाग नाथ्यो, अँवली करी असारी रे।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, हुँ छे दासी तमारी रे ॥४७६॥
२१
ब्रजमा कथम र' वाशे, ओधवना वा' ला, ब्रजमा कयम रें' वाशे।
आठ दाहाड़ानी^७ अवध करीने गया छे वा'ला, खर मास थया छे^८ हरि ने।
१ पति, २ जादू करनेवाला, ३ से, ४ सब, ५ बनाया, ६ अच्छा लगे,
७ दिवस, ८ हो गये।