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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२४८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
सबरी के झूठे बेर खाये, काज किए मन भाये ।
सदना ओ सैना नाई को तुम लीन्हा अपनाई ।
कर्मा की खीचडी तुम खाई, गनिका पार लगाई ।
मीराँ प्रभु तुम्हारे रंगराती, जानत सब दुनियाई । ॥४२९॥
उपर्युक्त दोनो पदो की प्रथम पक्ति का भाव-भाषा साम्य
विचारणीय है ।
२०
तुम बिन मोरी कौन खबर ले गोबरधन गिरधारी ।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, कुडल की छबि न्यारी रे ।
भरी सभा मे द्रोपदी ठारी, राखो लाज हमारी रे ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल बलिहारी रे ॥४३०॥
२१
देखत राम हँसे, सुदामा, कूँ देखत राम हँसे ।
फाटी तो फुलडियाँ, पॉव उभाडे चलते चरण धसे ।
बालपने का मीत सुदामा , अब क्यो दूर बसे ।
कहा भावज ने भेट पठाई, तदुल तीन पसे ।
कित गई प्रभु मोरी टूटी टपरिया, हीरा मोती लाल कसे ।
कित गई प्रभु मोरी गऊवन बछिया, द्वार बिच हस्ती फँसे ।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, सरणा तोरे बसे । ॥४३१॥
२२
गोकुल के बासी, भले ही आये गोकुल के बासी ।
गोकुल की नारी , देखत आनन्द सुख रासी ।
एक गावत एक नाचत, एक करत हॉसी ।
पींताम्बर के फेटा बॉधे, अरगजा सुबासी ।
गिरिधर से सुनवल ठाकुर, मीराँ सी दासी ॥४३२॥ †