मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २४७
यमुना के नीरे तीरे धेनु चरावे, मुरली बजावे नन्दलाला ।
वृन्दावन हरि रास रच्यो है, मीराँ की करौ प्रतिपाला ॥४२६॥
१७
या मोहन के मै रूप लुभानी ।
हाट बाट मोहि रोकत टोकत, या रसिया की मै सारी न जानी ।
सुन्दर बदन कमल दल लोचन, बाँकी चितवन मद मुसकानी ।
यमुना के नीरे तीरे धेनु चरावे, बसी मे गावे मीठी बानी ।
तन मन धन गिरधर पर वारू, चरण कमल मीराँ लपटानी ।
॥४२७॥†
पदाभिव्यक्ति मे पूर्वापर सबन्ध का निर्वाह नही हुआ है ।
१८
अब मै शरण तिहारी जी मोहि राखो कृपा निधान ।
अजामिल अपराधी तारे, तारे नीच सदान ।
जल डूबत गजराज उबारे, गणिका चढी विमान ।
और अधम तारे बहुतेरे, माखन सन्त सुजान ।
कुब्जा नीच भीलनी तारी, जाने सकल जहान ।
कहं लगि कहूँ गिणत नही आवै, थकि रहै वेद पुरान ।
मीराँ कहै मै शरण रावरी, सुनियो दोनों कान ॥४२८॥
१९
सुण लीजो बिनती मोरी , मै सरन गही प्रभु तोरी ।
तुम तो पंतित अनेक उधारे , भव सागर ते तार्यो ।
में सब का तो नाम नही जानूं, कोई कोई भक्त बखानो ।
अम्बरीष सुदामा नामी पहुचाये, निज धाम्र ।
ध्रुव जो पाँच बरस को बालक, दरस दियो घनस्यामा ।
धना भक्त का खेद जमाया, कबिरा बैल चराया ।