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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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२०६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
सो मद भगत करो जी न साधो, मत बिसरो नन्दलाल ।
काहू के चदो काहू के मदो, काहू के उर मे माल ।
प्रेम भरी मीराँ जिन गरजै, हिरदै गिरधर लाल ।
(येक) घडी घडी पल मोये जुग सम, बीतत हो गई हाल बेहाल ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, छुट गई जजाल ॥३३१॥†
पदाभिव्यक्ति मे सगति नही है ।
४
बाना¹ रो बिडद² दुहेलो रे ।
बाना पहर कहा गरबायो, मुक्ति न हामी खेलो (रे) ।
बाना रो प्रण-प्रह्लाद उबार्यो, बैर पिता सो गेल्यो (रे) ।
आगा धर पीछा मत ताको, दकतर नाहि चढैलो (रे) ।
मीराँ जी ने भक्ति कमाई, जहर पियालो गेल्यो (रे) ।
॥३३२॥†
श्री सूर्यनारायण जी चतुर्वेदी के मतानुसार यह पद सम्भवत
मीराँ लीला करने वालो का है । "मीराँ जी ने भक्ति कमाई" जैसी
अभिव्यक्ति के आधार पर इस मत की पुष्टि होती है ।
५
हरि से गरब किया सोई हारा ।
गरब किया रतनागर सागर, जल खारा कर डारा ।
गरब किया लकापति रावण, टूक टूक कर डारा ।
गरब किया चकवे चकवी ने, रैन बिछोहा डारा ।
गरब किया बन की चिरभी ने, मुख कारा कर डारा ।
१ वेश भूषा, २ यश ।