मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १६१
की ओर झुकी हुई है। “राती”, “माती”, “पाती” आदि तुकान्त
पद दूसरी शैली के हैं। इनकी भावाभिव्यक्ति पूर्वोक्त पदो की अभि-
व्यक्ति से सर्वथा भिन्न पड़ती है। इन पर सतमत का ही स्पष्ट प्रभाव
है इनकी भाषा भी खडी बोली से प्रभावित ब्रजभाषा है।
१८
भीड छाडि बीर बैद मेरे पीर न्यारी है।
करक कलेजे मारी ओखद न लागै कारी।
तुम घरि जावो बैद मेरे पीर भारी है।
बिरहित बिरह बाढयो, तातै दुख भयो गाढो।
बिरह के बान ले बिरहनि मारी है।
चित ही पिया की प्यारी नेक हूँ न होवे न्यारी।
मीराँ तो आजार बाँध बैद गिरधारी है। ॥३०९॥
सूर्यनारायण जी चर्तुवदी के अनुसार यह पद मीराँ का नही अपितु
“मीराँ लीला” करन वालो का है। पद की शैली को देखते हुए मै भी
निसकोच उनका समर्थन करती हूँ।
१९
हरि बिन कूँण¹ गति मेरी।
तुम मेरे प्रतिपाल कहिये, मे रावरी चेरी।
आदि अत निज नाव तेरो, हिया मे फेरी।
बरि बेरि पुकारि कहू, प्रभु आरति है तेरी।
यो ससार बिकार सागर, बीच मे घेरी।
नाव फाटी प्रभु पाल बाधो, बूडत है बेरी।
विरहणी पिव की बाट जोवै, राखिल्यो नेरी²।
दासी मीराँ राम रटत है, मै सरण हूँ तेरी ॥३१०॥
१ कौण, २ निकट।