सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 246, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 246

१६० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
इस पद को विभिन्न भी कुछ परिवर्तन के साथ चला हुआ पदो
का सम्मिश्रण ही कहा जा सकता है।
१६
राम तने रग राची, राणा मै तो सावलिया रग राची।
ताल पखावज मिरदग बाजा, साधो आगे नाची रे।
कोई कहे मीराँ भई बावरी, कोई कहै मदमाती रे।
विष का जो प्याला राणा भर भेज्या, अमृत कर आरोगी१ रे।
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर जनम जनम की दासी रे।
॥३०७॥
विभिन्न पदो का सम्मिश्रण ही इस पद का भी आधार प्रतीत
होता है।
१७
गोपाल रग राची, मै श्याम रग राची।
कहा भयो जल विषय के खाये, तिनहुते बॉची।
तात मात लोग कुटुम्ब तिन कीनी उपहासी।
नन्द नन्दन गोपी ग्वाल तिनके आगे मै नाची।
और सकल छाँडे के मै भक्ति काछ कॉची।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, जानत झूठी साँची ॥३०८॥
उपर्युक्त दस पदो मे एक गहरा साम्य है। यहाँ तक कि सरसरी
दृष्टि से देखने पर ये सभी पद एक दूसरे के गेय रूपान्तर से प्रतीत
होते हैं। परन्तु इन पर विचार करने से दो शैलियाँ सर्वथा स्पष्ट
दीखती है। "राँची", "साँची", "नाची" आदि तुकान्त पद एक
शैली विशेष के है। ऐसे पदो पर कही कही सतमत का हल्का सा प्रभाव
मिल जाता है, फिर भी इनकी भावाभिव्यक्ति प्रधानत वैष्णव-
परम्परा से ही प्रभावित है। ऐसे पदो की भाषा भी कुछ राजस्थानी
१ खा लिया, यहा होगा पी लिया।