मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंघर्षाभिव्यक्ति १२१
जावो ने मीराँ म्हाने मुख न दिखावो, म्हाने आवै थारी लाज ।
लाजै मीराँ पीहर सासरो, और लाजै म्हारो साज¹।
गोपी चन्दन तुलसी की माला, भीख मागत्यारो² साज ।
धन मीराँ धनि मेडतो, धनि राठोडारो राज ।
मीराँ के प्रभु अविनासी, चलि आयो व्रजराज ।।१९७।।†
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राणा जी हो जाति रो कारण म्हाँरै को नही
लागो म्हांरो हरि भगतां सूं हेत।
बिदुर कुला घरि जनमिया ज्या कै पावणा हुवा गोपाल
वदि छुडाई बसुदेव की कस कियो खो काल।
पाचू पाडू छठी द्रोपदी ज्या की न्यारी न्यारी जात,
सहस अठ्यासी मुनि आविया जाकी पण राखी रघुनाथ ।
वन मे होती स्योरी भीलणी ज्यांहका ओरग्य³ ठाकुर बोर ।
ऊच नीच हरि ना गिणै ऐसी म्हारा हरि भगतां की कोर ।
येक बेल दोय तूंबड़ा ज्याहूं की छै न्यारी न्यारी जात,
एक तूंबो जतर⁴ चढ़ै, दूजो हरि भगता कै हाथ ।
सख समदा५ नीपजै ज्याहू की न्यारी न्यारी जात,
एक सख सेवा६ चढै दूजौ भो पडता के हाथ ।
एक माटी दोय कलस है ज्याहूं की न्यारी न्यारी जात,
एक कलस सेवा चढै दूजो कलाला रै हाथ ।
कलक कटोरे विष धोलियो दियो मीराँ के हाथ,
हरि चरणोदक करि पी लियो हरि जी भयो सुनाथ ।
सब मिलि मत उपाइयौ मीराँ नै विष चौहा कहियौ,
। सुण्यो मानै नाहि नीच लग्यो हूठ. योह।
१ विभव, ठाठ, २ माँगने वालो का, ३ खाया, ४ वाद्य-यन्त्र
५ समुद्र, ६ पूजा ।