मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
पद विशेष महत्वपूर्ण है। यह एक ही पद ऐसा है जिसमे
“मेडतिया रा कागद” (मेडतिया के यहाँ से आया हुआ पत्र) का वर्णन है।
इस पद के आधार पर मीराँ का सधवा होना ही प्रामाणित हो जाता है।
पद का किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कहा जाना भी अभिव्यक्ति से ही
सुस्पष्ट हो उठता है। अत ऐसे पदो की प्रामाणिकता की विशेष
विवेचना आवश्यक है।
३३
हो जी हो सिसोद्या राजा मनडो वैरागी धन¹ रो क्या करू।
जहर का प्याला राणा जी भेज्या कोई द्यो मीराँ के हाथ।
कर चरणामृत मीराँ पी गई कोई आप जाणो रघुनाथ।
साप पिटारा राणा जी ने भेज्या कोई द्योने मीराँ ने जाय।
कर खग वालो पहिरयो कोई आप जानो दीनानाथ।
राणा जी दासी भेज्या कोई जावो ने मीराँ पास।
मर गया होय तो जला दीज्यो नातर नदी मे बहाय।
हो जी हो सिसोद्या राजा मनडो, वैरागी धन रो क्या करू।
।।१९६।।
राणा जी द्वारा मीराँ के पास दासी भेजे जाने की सर्वथा नवीन
कथा ही इस पद की विशेषता है। कथानक की प्रामाणिकता सर्वथा
संदिग्ध होते हुए भी राणा और मीराँ के पारस्परिक सबध के प्रति
चली आती परम्परागत भावना सुस्पष्ट हो जाती है। पद की शैली
वर्णनात्मक ह। अस्तु, यह पद तत्कालीन भावनाओ का प्रतिबिम्ब
ही कहा जा सकता है।
३४
राणौ म्हाने ऐसी कही महाराज।
भक्तन² होय मीराँ जगत लजायो,कीन्हों सारो साज।
१ स्त्री। २ विशेष उत्सव के अवसरो पर नाचने गाने वाली एक निम्नजाति
विशेष की स्त्री जो 'भगतन' के अर्थ मे रूढ़ि वाचक हो गया है।