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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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संघर्षाभिव्यक्ति ९५
राणो मन मे कोपियो जी मारो याके सेल१।
म्हारो तो पिराछित लागै जी, पीहर दो याको मेल ।
रथडा बैल जुपाइया२ जी, ऊटा कसियो भार ।
डावो३ छोडो मेडतो जी पेला४ पोषर५ जाय ।
राणा साडया मोकल्या जी, पाछा ल्यावो मोड ।
कुल की माडण६ हस्तरी७ जी, मुरड चली८ राठौड ।
मीराँ वचन उचेरिया९ जी गिरधर म्हारो मोड१० ।
थे पाछा जावो साडिया जी काने११ मोड़ो जोड१२ ।।१६६।। †
इस पद की अन्तिम कुछ पक्तियाँ विशेष विचारणीय है ।
उपर्युक्त तीनो ही पदो मे स्वानुभूति और अन्योक्ति का विचित्र
सम्मिश्रण हुआ है। बहुधा पुनरुक्ति भी हुई है। एक पद से व्यक्त होती
किसी घटना का दूसरे पद मे कोई स्पष्ट उल्लेख नही तथापि ऐसी कुछ
पक्तिया सभी पदो मे मिल जाती है, जिनसे कि उस घटना विशेष
का आभास मिल जाता है ।
भाव और भाषा के साम्य के आधार पर तीनो ही पद एक
दूसरे के गेय रूपान्तर प्रतीत होते है ।
४
मै तो सुमऱ्या छै मदन गोपाल, राणा जी म्हारो काई करसी ।
मीराँ बैठ्या महल मे जी, छापा तिलक लगाय ।
आया राणा जी महल मे जी, कोप कऱ्यो छै मन भाय१३ ।
मीराँ महला से उतऱ्या जी, ऊटा भार कसाय ।
१ कटार, २ जुतवाये, ३ बाँए, ४ सर्व प्रथम, ५ तालाब, ६ बनाने-
वाली, ७ स्त्री, ८ नाराज होकर चली, ९ उच्चारण किया, १० मोड
शब्द के तीन अर्थ होते हैं – लौटाना, सन्यासी का अवहेलनात्मक पर्यायवाची,
तोडना, ११ किसलिए, १२ जोडी या साथ, विशेषत दम्पति के अर्थ मे ही
'जोडी' शब्द व्यवहृत होता है। १३ मुन मे ।