मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवियोगाभिव्यक्ति ९१
खड़ी बोली
१
आली सावरे की दृष्टि मानो प्रेम कटारी है।
लागत बेहाल भई, तनं की सुधि बुधि गई।
तन मन व्यापो प्रेम, मानो मतवारी है।
सखियाँ मिलि दुइ चारी, बावरी सो भई न्यारी।
हो तो वाको नीके जानो, कुज की बिहारी है।
चन्द्र को चकोर चाहे, दीपक पतग दाहै।
जल बिन मीन जैसे, तैसे प्रीत प्यारी है।
बिनती करो है श्याम, लागो मै तुम्हारे पाम।
मीराँ प्रभु ऐसे जानो दासी तुम्हारी है ॥१६२॥†
भाव और भाषा दोनो के ही आधार पर पद की प्रामाणिकता संदिग्ध है।
२
जल्दी खबर लेना मेहरम मेरी।
जल बिना मीन मरे एक छन मे, एनै अमृत पाऊ तो झेरी झेरी।
बहुत दिनो का बिछोह घड़ा है, अब तो राखो नेडी नेडी।
चकोर को ध्यान लगो चन्दवा सो, नटवा को ध्यान लगी डोरी डोरी।
सन्त को ध्यान लगे राम प्यारे, भूख को ध्यान मेरी मेरी।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, तुम पर सूरत मेरी ठहरी ठहरी ॥१६३॥†