मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९० मीराँ बृहद्-पद संग्रह
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ब्रजमा केम रेवाशे, ओधवना वा'ला, ब्रज मा केम रेवाशे ।
जेरे डाडा जीवन गया छो वा'ला, दु खडा काने कहेवागे ।
बलवात थई ने वादी शूँ मूको, वा'ला, वरद तमारू जाशे ।
मीराँ बाई के प्रभु गिरधर ना गुण, वा'ला, गोपिका अरज काशे ।
।।१६०।।†
पद स० ५ तथा उपर्युक्त पद की पचम पक्तियो में साम्य हे, परन्तु
शेष पद सर्वथा भिन्न पडता हे ।
विभिन्न बोलियों में प्राप्त पद
पंजाबी
१
सावरे दी भालन भाये, सानू प्रेम दी कटारिया ।
सखी पूछे दोऊ चारे, व्याकुल क्यों मैया नारे ।
रग के रगीले मोंसे दृग भर मारिया ।
व्याकुल बेहाल भैयो, सुध बुध भूल गैया ।
अजहूँ न आये श्याम, कुंज बिहारिया ।
यमुना की घाटी बाटी, असो तेरी चाल पछाती ।
बसियां बजावी कान्हा, मैया मत वारिया ।
मीराँ बाई प्रेम पाया, गिरधर लाल ध्याया ।
तू तो मेरो प्रभु जी प्यारा, दासी हो तिहारियां ।।१६१।।†
पद की आठवी पंक्ति से अन्योक्ति ही स्पष्ट होती है। भाषा क
आधार पर भी पद की प्रामाणिकता संदिग्ध ही है ।