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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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वियोगाभिव्यक्ति ८७
४
शामले मल्या त बिसारी, ओधव ने वाले शामले मेल्या ते बिसारी ।
प्रीत करी ने पालव१ पकडो वाला, प्रेम नी कटारी मुने मारी ।
गोकुल थी मथुरा मै गयो छो वा'ला, कुब्जा सोलागी छै तस्ली२ ।
मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, चरण कमल बलिहारी ।।१५१।।†
५
ब्रजमा कयम रेवाशे३ ओधव ना वा'ला, ब्रज मा कयम रेवाशे ।
आठ दाहडानी४ अवध करी ने गया छो, वा'ला खटमास थय छेहरिने ।
वृन्दाबन की कुजगलिगाँ वाला, बैठा छे मुख मोरली धरी ने ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर ना गुण, वा'ला अमोरह्या छे आसडा भरी ने ।
।।१५२।।†
पदाभिव्यक्ति मे विरोधाभास स्पष्ट है ।
६
आव जो म्हॉरे नेडे५, ओधव न वा'ला, आव जो म्हारे नैडे ।
म्हॉरे आगणिये आबो मेर्यो, वा'ला कानुडो आवीने सायॉ बैडे ।
अमो जल जमुना भरवा गया ता, वाला कानुडो पड्यो छे म्हारी कैड़े ।
मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, वा'ला हरि मलवा मन हेरे ।।१५३।।†
पद की तीसरी पंक्ति शेष पद से सर्वथा भिन्न पडती है । पद मे
पूर्वापर सम्बन्धका भी सर्वथा अभाव है ।
७
कांनी भावे देखन जाऊं, श्यामलो वेरागी भयो रे ।
कोरी मटकी मां नही जमाऊं, गुबालेन हो कर जावूँरे ।
१ आँचल, २ नेह, ३ रहा जायगा, ४ दिनकी, ५ नजदीक, पास।