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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 365 में से

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पृष्ठ 144

यहाँ पृष्ठ का संपूर्ण और यथावत पाठ प्रस्तुत है:

८६ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह
गुजराती में प्राप्त पद
१
क्यारेँ¹ आवसे घेर कान रे, जोसिडा जोस² जुवो³ ने ,
दहीयो हमारी वाला दुर्बल थई केरे, थई गई थाकेली⁴ पान रे .
वृन्दा ते वनमां वाले रास रच्यो छे, सहस्त्र गोपी मा एक कानरे ।
बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, भावे भरिया भगवान र ।
॥१४८॥†
पदाभिव्यक्ति में पूर्वापर संबध का निर्वाह नही हुआ है ।
२
कागद कोण लई जाय रे, मथुरामां लखीए, प्रीत थोडी थोडी थाय⁵ रे ।
प्रीत तमीने मलवा ने तलखे, ने जोशोमति अन्न न खाय रे ।
वृन्दाबन की कुज गलियन मे, रोता रजनी जाय रे ।
मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, चरण कमल चित चोर रे ॥१४९॥†
अन्तिम पंक्ति का शेष पद से समन्वय नही होता ।
३
कही जइ⁶ करूं रे पोकार, कारी मुनी धावे लागे थे,
मे कही जई करूं पोकार रे ।
पिऊ जी हमारो पारधि भयो थे, मै तो भइ हरिणी शिकार रे ।
दूर से थी आइ गोली लग गई,शीरू थे,नीकर गयी पारम पार रे ।
प्रेम नी कटारी पुने⁷ खेच कर मारी था, थई गई हाल बेहाल रे ।
मीराँ के प्रभु गिरिधरना गुण, हो गई पारम पार रे ॥१५०॥†
१ कब, २ पंचाग, ३ देखी, ४ सूखा हुआ, ५ होती है, ६ जाकर,
७ मुझको ।