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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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वियोगाभिव्यक्ति ५३
४६
सहेल्या उद्दौ जी आया है।
आया पठाया स्याम का, मेरे मन नहीं भाया है।
एक निमिष के कारणै, षटमास लगाया है।
पहली प्रीत करी हमसूँ, पीछे पछताया है।
जमुना जल मे नहावता, सभी चीर चुराया है।
कुबज्या दासी कस की, जिन स्याम चुराया है।
मुरली तो मोहन लई, जिणि स्याम रिझाया है।
देखो सखी सहलियो, नैणां कंर ल्याया है।
सुष दुष अपने करम का, गोविन्द वर पाया है।
दोस कुणी को दीजिये, मीराँ गुण गाया है। ॥७४॥†
उपर्युक्त पद की क्रियाये सभी आधुनिक हिन्दी मे है। अत
पद का प्रक्षिप्त होना ही युक्ति सगत है।
४७
निजर भर न्हालो नाथ जी, हू तो थारे चरणा री दासी।
मै अबला तुम सबला स्वामी, नही मिलणा कौ टालो रें।
फूँक फूँक पग धरू धरणी पर, मति लगाज्यौ कोई कालौ रे।
आप तो जाइ द्वारिका छाये, हम सूं दे गया टालौ रे।
बालपने को बालसनेही, प्रीति बचन प्रतिपालौ रे।
च्यारि महिना आयो सियालो१, च्यारि महिना उन्हियालो२ रे।
कृपा करि मोहि दरसण दीज्यौ, अब ऋतु आयो बरसालौ रे।
सब जग म्हारी निन्दा करत है, कीन्ही मूढो३ कालौ रे।
सरण तुम्हारी लई सावरा, तुम भी दियो छै म्हासूं टालौ रे।
म्हारो घर मे भयो अधेरो, आण करो उजियालौ रे।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, विरह अगनि मत जालौ रे। ॥७५॥†
पदाभिव्यक्ति मे अर्थ संगति और पूर्वापर संबंध का सर्वथा
अभाव है।
१ जाडे की ऋतु, २ गर्मी की ऋतु, ३ मुख।