मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
पृष्ठ 760, कुल 866 में से
संदर्भ में पढ़ेंऐतिहासिक भौतिकवाद ४३७
नयी मानवताका जन्म होगा ।' कहा जाता है कि 'रूसके परिवर्तनसम्बन्धी
साहित्योंसे यह स्पष्ट है ।' वेब दम्पतिका कहना है कि 'रूसके नागरिक उसी
जीवनको आदर्श जीवन मानते हैं, जिसका ध्येय बन्धुओंका हित हो, चाहे वे बन्धु
किसी भी आयु, लिङ्ग, धर्म या जातिके हों ।' जॉनसनके अनुसार 'ईसाइयोंकी
तरह कम्युनिष्ट भी समाज-हितको ही जीवनका लक्ष्य मानते हैं । कम्युनिष्ट
ईसामसीहके सच्चे उत्तराधिकारी हैं । सभी धार्मिक नेताओने मानवके सामने जो
आदर्श रक्खे हैं, रूसके नागरिक ही उन आदेशोंके अनुसार जीवन-निर्वाह करते
हैं ।' इन सबका कारण मार्क्सवादीके मतानुसार 'उत्पादन-शक्तियों एवं उत्पादन-
सम्बन्धोंमें परिवर्तन ही है । रूसमें उत्पादन-शक्तियोंपर जनताका राज्यद्वारा
एकाधिकार है और उत्पादन सम्बन्ध समाजवादी है । इसीलिये वहीं नयी सभ्यता-
का जन्म हो सकता है ।' मेक्सिम गोर्कीके अनुसार 'सोवियेट कारखाना एक
समाजवादी शिक्षाकेन्द्र है, न कि पूँजीवादी कमाईखाना ।'
जहाँ किसी पक्षविशेषके समर्थनके लिये ही साहित्यिक तैयार किये जाते
हैं और इसी ढङ्गका इतिहास गढ़ा जाता है, वहाँके साहित्य एवं इतिहाससे किसी
सत्य घटना या सत्य सिद्धान्तका निर्णय असम्भव ही होता है । आजके मार्क्सवादी
इतिहासमें भी लाखो, करोड़ों मजदूरो, किसानोंको कोई नहीं पूछता है । हाँ, उनके
नामपर कुछ राजनीतिक चालबाजोकी ही इतिहास एव साहित्यमे प्रशसाके पुल
बाँधे जाते हैं और उन्हींका स्वागत-सत्कार होता है । लेनिन, स्टालिन आदि ही
ऐतिहासिक व्यक्ति कहलाये जाते हैं, मिल-मजदूरो, किसानोंको कौन जानता है ?
द्वन्द्ववादी विचार तर्ककी कसौटीपर अव्यभिचरित नहीं निकलते, यह दिखलाया
जा चुका है। ह्रास-विकास, निर्वाण-निर्माणके सिद्धान्तकी कहानी नयी नहीं, पुरानी
ही है । परन्तु इन सबमे अनुस्यूत, अविनाशी आत्माको भुलाकर इसका दुरुपयोग
किया गया है। अनाचार, पापाचार एव अन्याय भी विकासोन्मुख हो सकते हैं,
विविध प्रकारके रोग भी विकासोन्मुख होते हैं । सद्भावना, सद्गुण और स्वास्थ्य
भी ह्रासोन्मुख एव निर्वाणोन्मुख होते हैं । मार्क्सवादियोके अनुसार विकासोन्मुख-
का साथ देकर और ह्रासोन्मुखको दो धक्के देकर उसे शीघ्र ही खतम कर देनेकी
कल्पना अवसरवादिता, स्वार्थ-परायणता और दानवताके अतिरिक्त और कुछ नहीं
है । फिर तो मरणोन्मुख अपने साथीकी भी सहायता करना मूर्खता ही कही जायगी
और फिर चिकित्सा पद्धतिका विकास भी व्यर्थ ही समझा जायगा । इसके अतिरिक्त
बाह्यरूपसे बलहीन दशामें विद्यमान व्यक्ति या समूहकी विकासोन्मुखता भी किस
तरह विदित हो सकेगी ? मार्क्स तथा लेनिनने किसानोंको विकासोन्मुख नहीं समझा
था, परन्तु चीनमें ठीक उसके विपरीत अनुभव हुआ । इसीसे मार्क्सवादी अटकल-
का मिथ्यात्व सिद्ध हो जाता है । मार्क्सवादी असंगतियाँ काल्पनिक हैं । वे ऐसी
नहीं हैं जिनका समाधान ही न हो । अन्यथा किसी भी व्यक्ति, समुदाय,