मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished866 पृष्ठ
पृष्ठ 247, कुल 866 में से
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- ा + प + ् + र + क + ् + र + ि + य + ा + क + ो = क्रियाप्रक्रियाको.
Wait, is it "क्रियाप्रक्रियाको" or "क्रियाप्रतिक्रियाको"?
LOOK CLOSELY AT !
First word:
क् + र + ि + य + ा = क्रिया
Then:
प + ् + र + क + ् + र + ि + य + ा = प्रक्रिया
Wait, is there a 'ति' in it?
Let's look:
क ् र ि य ा
प ् र [?]
Wait! Between 'प्र' and 'क्रिया' is there a 'ति'?
Look at the letter:
It's 'प्र', then 'कि'? No, it's:
क ् र ि य ा
प ् र
त ि ? No, look:
It is: "क्रियाप्रक्रियाको" or "क्रियाप्रतिक्रियाको"?
Wait! Look at the letters:
1: क्रि (kri)
2: या (ya)
3: प्र (pra)
4: क्रि (kri)
5: या (ya)
6: को (ko)
Wait, is 4 'क्रि' or 'ति'?
Look at letter 4: it has a loop on the left and a curve on the right, with a diagonal slash at the bottom left: that's 'क्र'! And an 'ि' matra on top: 'क्रि'!