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सर्वकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

पृष्ठ 215, कुल 866 में से

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पृष्ठ 215

जी सकना ही मुश्किल था।' अनेक विद्वान् एशियामें भी मनुष्योंकी उत्पत्ति मानते
हैं। उनका कहना है कि 'पश्चिमोत्तर एशियामें ही मनुष्योंकी उत्पत्ति हुई, वहाँ से
भिन्न भिन्न श्रेणीके रूपमें लोग विभिन्न देशोंमें गये हैं।' मैक्समूलरने मध्य एशियामें
और स्वामी दयानन्दजीने तिब्बतमें मनुष्योंकी उत्पत्ति मानी है। उमेशचन्द्र दत्तके
मतानुसार मंगोलियामें मनुष्योंकी उत्पत्ति हुई है। अन्यान्य विद्वान् विभिन्न स्थान
मानते हैं।
संस्कृत, ग्रीक, लैटिन, जेन्द आदि भाषाओंकी तुलना करनेपर भी अधिकांश
विद्वान् इस निष्कर्षपर पहुँचे हैं कि इन भाषाओंके भाषी लोग कभी एक भाषा-
भाषी रहे होंगे। जैसे-जैसे वे एक दूसरेसे दूर होते गये, वैसे-वैसे उनकी भाषामें
कुछ भेद पडता गया। यद्यपि वे लोग इन भाषाओंको परस्पर भगिनी ही मानते
हैं। उनकी जननी कोई अन्य भाषा रही होगी—ऐसी कल्पना करते हैं, तथापि
संस्कृत भाषा ही सब भाषाओंकी जननी है—यह अधिक प्रमाणसिद्ध है। आज भी
संसारमें सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद माना जाता है। मोहेनजोदड़ो, हड़प्पाकी
खुदाईसे मिलनेवाली वस्तुओंसे भी वैदिक सभ्यताकी अतिप्राचीनता विदित
होती है। 'वाचा विरूपनित्यया'—विरूप नित्य वेद लक्षण वाणीद्वारा आप सृष्टि
करते हैं। इस वेद-वाक्यसे वेद अनादि सिद्ध होते हैं। मनु भी 'अनादिनिधना
नित्या वागुत्सृष्टा स्वयम्भुवा'—स्वायम्भुवने अनादि-निधन-उत्पत्ति-नाशविवर्जित वेद
लक्षण वाणीका उत्सर्ग किया; सम्प्रदायप्रवर्तन किया—इस वचनसे वेदको अनादि
बतलाते हैं। अतः सर्व प्राचीन भाषा संस्कृत भाषा ही सिद्ध होती है। उससे ही अन्य
भाषाओंका उद्गम हुआ है। उन अनादि अपौरुषेय वेदों, मनुस्मृति, चरक आदि
ग्रन्थोंसे मालूम पडता है कि सप्तद्वीपा मेदिनीमे जम्बूद्वीप श्रेष्ठ है और जम्बूद्वीपमे भी
भारतवर्ष ही सर्वोत्कृष्ट है। चतुर्दश भुवनोंमे पृथ्वी और पृथ्वीमे भारतवर्ष
विराट् पुरुषका हृदय-स्वरूप है। इसीमे आर्यावर्त्त, ब्रह्मावर्त्त एव हिमालय हैं।
इसीमें साङ्गोपाङ्ग सभी ऋतुओंका विकास होता है। इसीमें सभी रंगके
मनुष्य भी मिलते हैं, अतः यहीं मनुष्योंकी उत्पत्ति हुई है—
तेषां कुरुक्षेत्रं देवयजनमास। तस्मादाहुः कुरुक्षेत्रं वै देवानां देवयजनम्।
( शतपथ )
यदनु कुरुक्षेत्रं देवानां देवयजनं सर्वेषां भूतानां ब्रह्मसदनम्।
( रामोत्तरतापि० १ । १, तारसार० २ )
डॉक्टर ई० आ० एलंसका 'मेडिकल' पुस्तकमें कहना है कि 'हिमालयमें वनस्पति,
घास खूब होते हैं, अतः गाय, भैंस, बकरी, हाथी, कुत्ता आदि जानवर और
मनुष्यका भी वहाँ होना सङ्गत है। हिमालयमें प्राणियोंके बहुत पुराने शेषांश
मिलते हैं।' भाषाशास्त्री टेलर स्वर्गतुल्य काश्मीरको मनुष्य-जातिकी जन्मभूमि