संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण
Markandeya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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दिया॥७॥ वहाँ पहुँचकर उसने हिमालयपर
रहनेवाली उन देवीको देखा और ललकारकर
कहा- 'अरी! तू शुम्भ-निशुम्भके पास चल।
यदि इस समय प्रसन्नतापूर्वक मेरे स्वामीके समीप
नहीं चलेगी तो मैं बलपूर्वक झोंटा पकड़कर
घसीटते हुए तुझे ले चलूँगा' ॥ ८-९ ॥
दैत्येश्वरेण प्रहितो बलवान् बलसंवृतः।
बलान्नयसि मामेवं ततः किं ते करोम्यहम् ॥ १० ॥
देवी बोलीं - ॥ १० ॥ तुम्हें दैत्योंके राजाने
भेजा है, तुम स्वयं भी बलवान् हो और तुम्हारे
साथ विशाल सेना भी है; ऐसी दशामें यदि मुझे
बलपूर्वक ले चलोगे तो मैं तुम्हारा क्या कर
सकती हूँ ॥ ११॥
ऋषिरुवाच ॥ १२ ॥
इत्युक्तः सोऽभ्यधावत्तामसुरो धूम्रलोचनः ।
हुंकारेणैव तं भस्म सा चकाराम्बिका ततः ॥ १३ ॥
अथ क्रुद्धं महासैन्यमसुराणां तथाम्बिके।
ववर्ष सायकैस्तीक्ष्णैस्तथा शक्तिपरश्वधैः ॥ १४ ॥
ततो धुतसटः कोपात्कृत्वा नादं सुभैरवम् ।
पपातासुरसेनायां सिंहो देव्याः स्ववाहनः ॥ १५ ॥
कांश्चित् करप्रहारेण दैत्यानास्येन चापरान् ।
आक्रम्य चाधरेणान्यान् स जघान महासुरान् ॥ १६ ॥
केषांचिपाटयामास नखैः कोष्ठानि केसरी ।
तथा तलप्रहारेण शिरांसि कृतवान् पृथक् ॥ १७ ॥
विच्छिन्नबाहुशिरसः कृतास्तेन तथापरे ।
पपौ च रुधिरं कोष्ठादन्येषां धुतकेसरः ॥ १८ ॥
क्षणेन तद्बलं सर्वं क्षयं नीतं महात्मना ।
तेन केसरिणा देव्या वाहनेनातिकोपिना ॥ १९ ॥
ऋषि कहते हैं- ॥ १२ ॥ देवीके यों कहनेपर
असुर धूम्रलोचन उनकी ओर दौड़ा, तब अम्बिकाने
'हुं' शब्दके उच्चारणमात्रसे उसको भस्म कर
दिया॥ १३॥ फिर तो क्रोधमें भरी हुई दैत्योंकी
विशाल सेना और अम्बिकाने एक-दूसरेपर तीखे
सायकों, शक्तियों तथा फरसोंकी वर्षा आरम्भ
की ॥ १४॥ इतनेमें ही देवीका वाहन सिंह क्रोधमें
भरकर भयंकर गर्जना करके गर्दनके बालोंको
हिलाता हुआ असुरोंकी सेनामें कूद पड़ा ॥ १५ ॥
उसने कुछ दैत्योंको पंजोंकी मारसे, कितनोंको
अपने जबड़ोंसे और कितने ही महादैत्योंको पटककर
ओठकी दाढ़ोंसे घायल करके मार डाला ॥ १६ ॥
उस सिंहने अपने नखोंसे कितनोंके पेट फाड़
डाले और थप्पड़ मारकर कितनोंके सिर धड़से
अलग कर दिये ॥ १७ ॥ कितनोंकी भुजाएँ और
मस्तक काट डाले तथा अपनी गर्दनके बाल
१. पा०-तथाम्बिकाम्। २. पा०-आक्रम्या । ३. पा०-चरणेनान्यान् । ४. यहाँ तीन तरहके पाठान्तर मिलते
हैं- संजघान, निजघान, जघान सु महा० । ५. पा०-केशरी। बंगला प्रतिमें सब जगह 'केसरी' और 'केसर' शब्दमें
तालव्य 'श' का प्रयोग है।