मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 83, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूमिका । = १
पीठायतन के विषय में कुछ श्रुतियां दिखलाते हैं—
‘ सितासिते सरिते यत्र संगते
तत्राप्लुतासो दिवमुत्पतन्ति ।
ये वै तन्वं विसृजन्ति धीरा-
स्ते जनासो अमृतत्वं भजन्ते ॥ ’
इससे गङ्गा यमुना और इनका संगम तथा संगमस्थान
का फल स्पष्ट है । इसीलिये ‘ तीर्यते अननेति तीर्थम्=संसार-
सागर से तिरने का उपाय ’ यह तीर्थ शब्द का अर्थ है और
इसीसे लक्ष्यानुसार तीर्थराज-प्रयाग की सिद्धि होती है ।
‘ तदेवाग्निस्तदादित्यः—’
इस पूर्वोक्त श्रुति से अग्नि आदि प्रसिद्ध हैं ।
‘ अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषोऽन्तरात्मा
सदा जनानां हृदये संनिविष्टः । ’
‘ शतं चैका हृदयस्य नाड्य-
स्तासां मूर्धानमभिनिःसृतैका ।
तयोर्ध्वमापन्नमृतत्वमेति
विष्वङ्गेता उत्क्रमणे भवन्ति ॥ ’
इससे हृदयादि स्थान का बोध होता है । और कई
एक साहसी यह कहते हैं कि वेद में मूर्तिपूजन नहीं है,
अतएव-
‘ न तस्य प्रतिमा अस्ति
यस्य नाम महद्यशः ’
इस श्रुति में प्रतिमा का निषेध है । उनको यह समझना
चाहिये कि यहां पर ‘ प्रतिमा ’ शब्द का अर्थ मूर्ति नहीं है;
किन्तु ‘ उपमा ’ अर्थ है ।