मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 82, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ें८० मनुस्मृति ।
'अप्सवग्नौ हृदये सूर्ये स्थण्डिले प्रतिमासु च ।
षट्स्वेतेषु हरेः सम्यगर्चनं मुनिभिः स्मृतम् ॥'
अग्निपुराण ।
'स होवाच प्रजापतिः, षडरं वा एतत् सुदर्शनं महाचक्रं—'
इत्यादि ।
नृसिंहतापनी ।
'ते होचुरुपासनमेतस्य परमात्मनो गोविन्दस्याखिला-
धारिणो ब्रूहीति । तानुवाच यत्तस्य पीठं हैरण्यमष्टपलाशमम्बुजं,
तदन्तरालेऽनलास्रयुगं, तदन्तराद्यार्णमखिलबीजं कृष्णाय नम
इति—' इत्यादि ।
गोपालतापनी ।
'एवं त्रिकोणरूपं स्यात्—' इत्यादि ।
रामतापनी ।
यहां जल से सामान्य जल तथा गङ्गा यमुना आदि के
विशेषजल; अग्नि से गृह्याग्नि, श्रौताग्नि और तान्त्रिकाग्नि;
हृदय से श्रुतिप्रसिद्ध हृदय तथा तन्त्रप्रसिद्ध अनाहत, विशुद्धि,
आज्ञा और सहस्रार; सूर्य से भौतिक सूर्यमण्डल तथा चन्द्र-
मण्डल; स्थण्डिल से अनेकविध मनोहारी पवित्र पीठ;
प्रतिमा से परमेश्वर के परिचायक नानाविध चल तथा स्थिर
आर्ष आकार विशेष; यन्त्र से विहित द्रव्य से विहित आधार
पर लिखित आर्ष विन्दु त्रिकोणादि संनिवेश विशेष का
ग्रहण इष्ट है ।
१ शैली दारुमयी लौही लेप्या लेख्या च सैकती । मनोमयी मणिमयी प्रतिमाष्ट
विधा स्मृता ॥' भागवत.