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सर्वकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 649 में से

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पृष्ठ 80

७८ मनुस्मृति ।
धारण करनेवाला ) आदि नाम; शिव के चन्द्रशेखर,
त्र्यम्बक, भूतेश आदि नाम; शक्ति के सरस्वती, लक्ष्मी, गौरी
आदि नाम; गणेश के हेरम्ब, लम्बोदर आदि नाम; तथा
सूर्य के विकर्त्तन, विरोचन आदि नाम; आकारोपाधिक होने
से कृष्ण आदि पांच आकार ( विशेष्य ) के बोधक होते हैं ।
यदि विष्णु ( वेवेष्टि ) शिव ( शिवयति ) शक्ति ( शक्नोति )
गणेश ( गणानामीशः ) और सूर्य ( सुवति ) एकत्व विवक्षा से
ग्रहण किये जायं तो आकारोपाधिक ( नियत रूप के बोधक )
न होनेसे परस्पर विशेषण-विशेष्य-भाव को प्राप्त होकर एक
व्यक्ति ( परमेश्वर ) के बोधक होते हैं । यही रहस्य पञ्चा-
यतन की मुख्य गुण-भाव-कल्पना में भी है । किं बहुना,
पौराणिक तान्त्रिक सहस्रनाम-स्तोत्रों में ये दोनों प्रकार के
नाम ( भेदक-अभेदक ) पढ़े हैं और इन्हीं विष्णु आदि नाम
के अनुरोध से वैष्णव आदि उपासकों की संज्ञा हुई है !
और जो—
' छन्दांसि यज्ञाः क्रतवो व्रतानि
भूतं भव्यं यच्च वेदा वदन्ति ।
अस्मान्मायी सृजते विश्वमेत-
तस्मिंश्चान्यो मायया संनिरुद्धः ॥
मायां तु प्रकृतिं विद्यान्मायिनं तु महेश्वरम् ।
तस्यावयवभूतैस्तु व्याप्तं सर्वमिदं जगत् ॥'
( श्वे० उ० ४-५, १० )
इत्यादि उपनिषद् वाक्यों के अनुसार माया ( शक्ति ) और
मायावान् ( शक्तिमान्-परमेश्वर ) ये धर्मधर्मि-भेद से दो
पदार्थ कल्पना किये हैं, इनको चाहे लक्ष्मी और विष्णु शब्द