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मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 76, कुल 649 में से

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पृष्ठ 76

७४ मनुस्मृति ।
हिरण्यगर्भो योगस्य वक्ता नान्यः पुरातनः ॥
अपांतरतमाश्चैव वेदाचार्य्यः स उच्यते ।
प्राचीनगर्भं तमृर्षि प्रवदन्तीह केचन ॥
उमापतिर्भूतपतिः श्रीकण्ठो ब्रह्मणः सुतः ।
उक्तवानिदमव्यग्रो ज्ञानं पाशुपतं शिवः ॥
पञ्चरात्रस्य कृत्स्नस्य वक्ता तु भगवान् स्वयम् ।
महाभारत ।
पञ्चरात्रादि तन्त्रों की गणना-पञ्चरात्र (नारद पञ्चरात्र)
पाशुपतज्ञान अर्थात् शिवसूत्र, परशुराम सूत्र, चतुःषष्टितन्त्र,
तथा दक्षिणामूर्ति संहिता, सनत्कुमार संहिता, परमानन्द, कुलार्-
णव आदि। चतुःषष्टि तन्त्रों का अनुगत विभाग यह है—
१ महामाया, २ शम्बर, ३ योगिनी, ४ जालशम्बर, ५
तत्त्वशम्बरक, ६ भैरवाष्टक, १४ बहुरूपाष्टक (ब्राह्म्यादि सप्त
माता और शिवदूती के प्रतिपादक-बहुरूप तन्त्र ८) २२
यामलाष्टक (ब्रह्मयामल, विष्णुयामल, रुद्रयामल, लक्ष्मी
यामल, उमायामल, स्कन्दयामल, गणेशयामल, जयद्रथयामल)
२३ चन्द्रज्ञान, २४ वासुकि, २५ महासंमोहन, २६ महोच्छुष्म,
२७ वातुल, २८ वातुलोत्तर, २९ हृद्भेद, ३० भेद, ३१ गुह्य, ३२
कामिक कलावाद, ३४ कलासार, ३५ कुब्जिकामत, ३६ ततोत्तर,
३७ वीणास्य, ३८ चोतुल, ३६ श्रोतलोत्तर, ४० पञ्चामृत, ४१
रूपभेद, ४२ भूतोडामर, ४३ कुलसार, ४४ कुलोड्डीश, ४५
कुलचूडामणि, ४६ सर्वज्ञानोत्तर, ४७ महाकालीमत, ४८ महा-
लक्ष्मीमत, ४९ सिद्धयोगेश्वरीमत, ५० कुरूपिकामत, ५१
देवरूपिकामत, ५२ सर्ववीरमत, ५३ विमलामत, ५४ पूर्व, ५५
पश्चिम, ५६ दक्ष, ५७ उत्तर, ५८ निरुत्तर, ५६ वैशेषिक,