मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 75, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूमिका । ७३
तान्त्रिकमन्त्र के उल्लेख से 'तन्त्र' क्या पदार्थ है, इस
बात की जिज्ञासा होती है। यद्यपि तन्त्र-शब्द का अर्थ दर्शन
है तो भी यहां तन्त्र से विष्णु-शिव प्रोक्त ग्रन्थ विवक्षित हैं।
जैसे कर्म के उपबृंहक कल्पसूत्र-मन्वादि स्मृति, उपासना के
उपबृंहक शाण्डिल्य विद्या-पारमहंस संहिता, ज्ञान के उपबृंहक
उपनिषद्-योगवासिष्ठ हैं; तथा कर्म-उपासना-ज्ञान के उप-
बृंहक पुराण-उपपुराण-इतिहास हैं; वैसे ही प्रधान रूप से
उपासना तथा ज्ञान के उपबृंहक तन्त्र हैं। जैसे उक्त ग्रन्थों में
निराकार किंवा साकार ब्रह्म-भावनानूसार ज्ञाननिष्ठा और
कर्मनिष्ठा का प्रयत्नपूर्वक निरूपण है; वैसे ही इस तन्त्र में
ज्ञान-कर्मनिष्ठा की धूम है। जैसे उक्तग्रन्थों में उत्तम, मध्यम
और मन्द अधिकारियों के अनुसार ही ज्ञान-कर्म तथा उनके
अवान्तर भेदों का विनियोग कहा है-एवं तन्त्र में भी है। जैसे
वैदिक-संपत्ति, शाखा-भेद आदि से अपरिच्छिन्न है-एवं
तान्त्रिक-संपत्ति भी है।
अत एव ये वचन हैं-
'सांख्यं योगः पञ्चरात्रं वेदाः पाशुपतं तथा।
श्रुतिप्रमाणान्येतानि हेतुभिर्न विरोधयेत्॥'
योगि-याज्ञवल्क्य।
'सांख्यं योगः पञ्चरात्रं वेदाः पाशुपतं तथा।
कृतान्त (सिद्धान्त) पञ्चकं विद्धि ब्रह्मणःपरिमार्गणे॥' १
(विष्णु धर्मोत्तर)
'सांख्यस्य वक्ता कपिलः परमर्षिः स उच्यते।
१ श्री रामानुजाचार्यकृत श्रीभाष्य में उत्तरार्ध यों है-
'आत्मप्रमाणान्येतानि न हन्तव्यानि हेतुभिः।'