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सर्वकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 130, कुल 649 में से

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१२८ मनुस्मृति ।
अन्त में, भगवान् सत्यरूप धर्म का जय जयकार-पूर्वक
महाकवि श्रीभवभूति का श्लोक निर्मत्सर-शुद्धान्तःकरण विवेक-
शील-महानुभाव विद्वानों को सुनाकर वक्तव्य पूर्ण करता हूं ।
‘ये नाम केचिदिह नः प्रथयन्त्यवज्ञां,
जानन्ति ते किमपि तान्प्रति नैष यत्नः ।
उत्पत्स्यतेऽस्ति मम कोऽपि समानधर्मा,
कालोह्ययं निरवधिर्विपुला च पृथ्वी ॥’ इति ।
ॐ शान्तिः, शान्तिः, शान्तिः ।
नवलकिशोर विद्यालय
गोमती तट, लक्ष्मणपुरी, } गिरिजाप्रसाद द्विवेदी ।
मार्गशीर्ष शुक्ल ५ गुरुवार सं० १९७३