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सर्वकोश
मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary

नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा

DevanagariHindipublished145 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 145 में से

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पृष्ठ 62

...").
Nilakantha's commentary introduces RV 1.126.1:
What does it say?
"तिस्रो मातृ..." -> "तिस्रो मातृरीक्षन् पितृनियुक्तं तत्र मुख्यं पितरं मुख्यां मातरं चाह" ?
Wait, "मातृरीक्षन्"?
Let's look at the letters:
म + ा = मा
त + ृ = तृ
then: look at the next letter:
It has a loop like 'छ' or 'क्ष'?
Wait, look at 'क्षी' in 'कक्षीवान्' (L26)!
In 'कक्षीवान्': क, क्ष, ी, व, ा, न्.
Now look at the word in L23:
म, ा, त, ृ, then क्ष, ी, न्!
Yes, exactly identical to 'क्षीन्'! So it is printed as "मातृक्षीन्"! (Probably a misprint for 'मातृरीक्षन्' or similar, but printed as 'मातृक्षीन्').
Then: "पितृनियुक्तं तत्र मुख्यं पितरं मुख्यां मातरं चाह ।"
Then: "अमन्दा-"

Line 24:
निति सप्तर्चेन सूक्तेन । तत्र प्रकृतोपयोगि मन्त्रचतुष्टयं व्याख्यायते । भाव्य-
Wait, "सप्तर्चेन सूक्तेन": RV 1.126 has 7