मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary
नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीः ॥
श्रीजानकीवल्लभो जयतितराम्।
अथ मन्त्ररामायणम्
सटीकम् ।
रामायणद्रुमं नौमि रामरक्षानवांकुरम् ।
गायत्रीबीजमाम्नायमूलं मोक्षमहाफलम् ॥१॥
राम रक्षा रूपी नवीन अंकुर वाले, गायत्री बीज वाले, वेदरूपी
मूलवाले और मोक्ष रूपी महान फलवाले रामायण रूपी वृक्ष को मैं
नमस्कार करता हूं ।
ऐसा कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में चौबीस
सहस्र श्लोक गायत्रीमंत्र के २४ अक्षरों के आधार पर संगृहीत किये
हैं । रामायण के वेदत्व के विषय में अगस्त्य संहिता आदि प्रमाण हैं ।
गायत्री मंत्र में सविता देवता की स्तुति की गयी है । सविता को भग-
वान् नारायण की ज्योति भी कहा जाता है । भगवान के नानारूपो
में अवतार लेकर क्रीडा करने वाले रामादि रूपों की रामायण में
उपासना की गयी है और यह आवागमन से रहित कैवल्य की ओर
ले जाने वाला है ।
अत्र रामरक्षायाः रामायणद्रुमांकुरत्वं स्पष्टमवगम्यते, तत्स्थानां राघवा-
दिपदानां क्रमेण रामायणार्थसूचकत्वात् तस्याः गायत्रीबीजत्वं वेदमूलत्वं चोप-
पादनीयम् तेन रामायणस्यापि तदुभयं सिद्धयति । अत एव रामायणे चतुर्विंश-
त्साहस्र्यां चतुर्विंशतिगायत्र्यक्षराणि वाल्मीकिना संगृहीतानीत्यभियुक्तप्रसिद्धं