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सर्वकोश
मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary

नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा

DevanagariHindipublished145 पृष्ठ

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अनिमेषणोपलक्षिता देवा एवास्य धारास्ते च भूर्णयः बहुवद्धाः पाशिनः पाशवन्तश्च
सेतवो बन्धनकारिणश्च स्यमन्तस्योवो त्वत्प्रेरिताश्च देवाः सर्वस्मास्मान्पान्त्वित्यर्थः ।
इतः परं सूक्तशेषः प्रागेवोपोद्घाते व्याख्यातः ॥ १५३ ॥
अष्टौ पुत्रासो अदितेर्ये जातास्तन्व१स्परि ।
देवां उपप्रैत्सप्तभिः परामात्तण्डमास्यत् ॥ १५४ ॥
ऋ० १०. ७२, ८
जैसे लक्ष्मणादि राम के अनन्य हैं वैसे उनकी पत्नी सीता राम की
अनन्य है । रामादि चारों भाइयों के आठ पुत्र विभिन्न स्थानों के राजा
हुए । वह जगन्माता द्युलोक में पुत्रों के साथ गयीं । वे चारों गार्हस्थ्य
वर्णाश्रम धर्म का पालन करते हुए ब्रह्मलोक में गये ।
एवं स्तुत्वा गतेषु मुनिषु शेषमवतारकृत्यं “वम्वस्य मध्ये मिथुनाविवती,
अश्नम्भीर्यारोदयन्मुषायन्” इति उपोद्घाते एव किंचिद्व्याख्यातं ततोप्य