मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary
नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा
पृष्ठ 11, कुल 145 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूमिका
बहुधा विजया दशमी का पर्व निकट आने पर पत्र पत्रिकाओं में यदा-कदा
रामायण के विभिन्न पात्रों, जैसे श्रीराम, दशरथ, सीता, जनक आदि का वेदों
में उल्लेख होने के विषय पर विद्वानों द्वारा लेख लिखे जाते हैं। परन्तु इस
प्रकार के लेखों से कभी भी यह सिद्ध नहीं हो पाता कि इन नामों का रामायण
के इन्हीं नाम के पात्रों से या रामायण में वर्णित क्रियाकलापों से भी कोई
सम्बन्ध है। फलस्वरूप आधुनिक विद्वान् रामकथा के वेदकत्व को सिद्ध कर
पाने में अब तक असमर्थ ही रहे हैं।
परन्तु यह आश्चर्य की बात है कि अनेक शताब्दियों पूर्व प्रख्यात
भाष्यकार श्री नीलकण्ठ ने इस विषय का अत्यन्त पाण्डित्यपूर्ण समाधान कर
दिया था। इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि श्री नीलकण्ठ द्वारा रचित यह
मन्त्र रामायण इतने अधिक वर्षों से अनुपलब्ध थी और आज लोगों को इसका
स्मरण भी नहीं रह गया है। नीलकण्ठ ने ऋग्वेद से १५७ मन्त्रों का चयन
कर उनकी इस प्रकार व्याख्या की है कि उन मन्त्रों से सम्पूर्ण रामकथा व्यक्त
होती है। स्पष्ट है कि नीलकण्ठ अपने तर्कपूर्ण पाण्डित्य के कारण ही इस
कार्य में सफल हुए हैं। व्याख्या में उनके तर्क इतने सटीक हैं कि इस ग्रन्थ को
पढ़ने के बाद रामकथा के वेदकत्व पर सन्देह का लेश भी शेष नहीं रहता।
यहाँ नीलकण्ठ के तर्कों की महत्ता या समीचीनता के विषय में कुछ कहना
मेरी धृष्टता होगी। मैं तो इतना ही कह सकता हूँ कि प्रस्तुत ग्रन्थ में नील-
कण्ठ की ऋग्वेद के मन्त्रों की रामकथा-परक व्याख्या को पढ़कर इसके वेदकत्व
के प्रति कहीं भी सन्देह का स्थान नहीं रह जाता। मुझे पूर्ण विश्वास है कि
आधुनिक विद्वान् इसे पढ़ने के बाद अब अधिक अधिकारपूर्वक रामकथा के
वेदकत्व को सिद्ध करने तथा जहाँ नीलकण्ठ ने विषय को छोड़ा है उसे आगे
बढ़ाने का प्रयास कर सकेंगे।
पुस्तक के सम्पादन में मेरा दो ही योगदान रहा है : (१) मैंने नीलकण्ठ
द्वारा सङ्कलित ऋग्वेद के मन्त्रों का सन्दर्भ संकेत दे दिया है जिससे विद्वान्
उन मन्त्रों को सरलता से खोज सकें। (२) मैंने नीलकण्ठ की व्याख्या के