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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

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पृष्ठ 87

संक्षिप्य तन्त्रेभ्यो नगरस्य तु लक्षणम् ॥ १ ॥
Wait, वक्ष्ये: व क्ष्ये.
संक्षिप्य: सं क्षि प्य.
तन्त्रेभ्यो: त न्त्रे भ्यो.
नगरस्य तु लक्षणम् ॥ १ ॥

शतदण्डं समारभ्य शतदण्डविवर्धनात् ।

शतत्रयावसानं स्याद्दिशतदण्डं स(ण्ड)मारभेत् ॥ २ ॥ 4
Wait, let's look at स्याद्दिशतदण्डं:
Notice under द्दिश there is a tiny द्वि!
In print, Acharya often printed small subscript corrections, or is that a typo printed under it?
It is a small द्वि printed directly beneath the द्दि of स्याद्दिशतदण्डं.
How to represent it?
स्याद्दि॒द्विशतदण्डं or स्याद्दिशतदण्डं with note, or स्याद्दिशतदण्डं?
Wait, can we write स्याद्(द्वि)शतदण्डं or स्याद्दिशतदण्डं?
Look closely: the line has:
शतत्रयावसानं स्याद्द्विशतदण्डं?
Wait,