सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 853, कुल 856 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 853

CHAPTER LXX
4. I. कियानां भवतो for क्रियारम्भतः suggested by the other Mss.
6. (1) I. स्वाहा, B. स्त्वाहा, for हानि suggested by the other Mss.
(2) C. omits lines 6—14.
7. B. नवश्राद्ध, I. प्रसून for नयमोन्मेष suggested by the context and
the other Mss.
9. B. लोकस्य for लोचनस्य।
16. B. C. प्रासादादि।
20. I. वृषा for प्रपा suggested by the other Mss.
26. B. C. दर्शमाद्यै।
27. (1) I. रक्त for रत्नः suggested by the other Mss. (2) B. omits
this line.
30. दारु appears to be for नव, compare line 36.
33. B. वच for नैर्ऋत्य।
34. C. कुर्यादर्भेकं चै।
35. C. कृतं, I. विदु for बुधः, suggested by B.
42. B. स्यादन्यकुम्भाश्वसं तथा।
I. मध्येन कुम्भैः स्यादन्यैः।
C. स्यादेतकं भसमं तथा।
44. C. सवितान, B. संप्रदान।
46. I. पूजां, B. C. प्राज्ञैः।
47. B. क्रमात्, I. C. कू(कु)श।
53. I. स्याज्वादि, B. C. स(? श)स्यादधि।
54. I. ताम्बुलं वा, B. C. ताम्बुलादि।
57. After line 56 owing to some great confusion the codex archi-
typus follows the following order :—(1) 99—112, (2) 85—98, (3) 72—84,