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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 823, कुल 856 में से

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पृष्ठ 823

CRITICAL NOTES : CHAPTER LIV 279
81. O. मानयोर्दश।
86. I. परिदं for वरदं suggested by the other Mss.
87. B. C. गोपाला, I. गोवाला।
89. (1) B. दीर्घतीक्ष्णी, C. दीर्घकर्णी।
(2) I. महोदरो, the other Mss. मनोहरा।
90. B. चाक्षशृंगोद्भवमाभवेत्।
C. चाक्षश्रीगो····भवेत्।
I. श्वे·········शोद्भवमाभवः।
91. B. मध्यं कांचोललं मवेत्, C. omits this.
92. (1) I. विशनबाह्य च ग्रोव, B. विशालास्य सुग्रीव। (2) B. टुंद,
C. तुगय्य for तुवंड।
(3) I. स्फि for स्फि suggested by the other Mss.
93. B इंदु for वृत।
94. (1) C. omits the lines 94—97.
(2) I. ग्या for याँ suggested by the other Mss
98. B. कोत्तरोय, I. कोत्तयै।
103. B. C. शाखो for स्याते।
104. B. C. दंतिलंबुकरा, I. वामदन्तिकरा भवेत्।
107. I. ईश for दङ्ग suggested by the other Mss.
110. I. वाद्यते for वक्ष्यते suggested by the other Mss.
113. I. भवत् for भय suggested by the other Mss.
116. (1) B. केचिद्गलनिहस्तुंगं।
(2) C. notices here यस्मिन्स्थले पत्रमेकं न्यूनं, and omits the next
35 lines.
117. B. मटकतान्वितं।
119. I. पृष्ठे देवी, the other Mss. पृष्ठे वेदि।
121. B. हस्ताग्रे।
122. B. वालिनाभयं।
127. B. मषेाचो for माहेन्द्रो।
134. B. प्राक्वक्त्रास्या, I. पीश्ववतीं (वक्तो) स्यात्।
135. B. किरीटं मकुटं तथा।
136. B. भैरवी बर्गेरालका।