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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 751, कुल 856 में से

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पृष्ठ 751

CRITICAL NOTES : CHAPTER XXXIV 207
379. B omits lines 379-381.
380. C. हल्प। In line 374 the name is again हर्म्यं।
382. C. रस for षड्।
384. I. महतशिखेन, J. परितोद्वयं।
385. (1) B. चलत, C. चांपत for चावृत। (2) I. C. भूवरा, B. भूपरा, J.
भूवृता। (3) I. भुवरानिन्द्र।
386. I. कल्पे for कर्णे suggested by the other Mss., and the sense.
387. I. मेकर्द्विञ्चि, J. चैकार्द्विचै।
388. I. मसुकाख्य for भृङ्गारारूय suggested by the other Mss., and the
sense.
393. I. मांसं, J. वांसं।
394. I. J. C. वार, B. पाद।
397. I. द्विशैतञ्च च, J. and the other Mss. द्वयंशीकं तत्र।
400. I. तथा, J. तदायतम्। ललाटे is apparently for ललाटमण्डपं, because
in all the previous instances the measure of the area is followed by the
measure of the pavilion; compare lines 406, 409, 414 and 499 where the
reading is चूलिहर्म्यं।
401. J. चाग्रे, I. वाग्रे।
(2) B. omits the next 27 lines.
404. C. काप्रे for वाग्रे।
405. I. तददष्टा, J. षडष्ट।
407. B. C. भागोक्तं, I. J. मार्गांशकं।
408. I. J. वार for द्वार।
409. This is omitted by C.
410. J. भूगतं, C. सूत्रकं for प्रागतं।
411. J. क्रम, I. तु।
417. I. ....कम्, J. निम्नलिन्दकम्, C. मंडपानांतु लिन्दकम्।
418. I. J. चरं for द्वारं suggested by the other Mss., and the sense.
(2) C. विस्तारे चायतायतम्, I. J. विस्तारं चाथ दैवतम्।
419. J. तद्वि भागेन।