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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 728, कुल 856 में से

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184 MĀNASĀRA
151 C. समं भवेत् सहैव च ।
152. (1) I. नवतारान, J. चावतारान; of this line C. has only सवतार
दशालये ।
153. C. दिक्पालाना ।
154. C. चोक्तदेशे यतेपवत् for the last expression.
155. C. leaves the first pāda in a lacuna.
156. (1) I. जनि, C. जन for जिन suggested by J. and usage. (2) I. कक्ष्ये
for मार्गवत् suggested by J. and the other Mss.
157. C. omits the second pāda.
158. C. दिर्गनि for तीर्थानि ।
164. (1) I. जन for जिन । (2) I. समं for सर्व suggested by J. and the
other Mss.
165. (1) C. परिचारकं । (2) I. कुर्वन्ति for कुर्यात् suggested by J. and
the other Mss.
166. (1) J. मभुत्तेष्वपि ।
(2) C. पूर्ववत्कमसश्चेच्चत्रिदोनाकृक्षत्वसंमवेते ।
167. C. J. विष्णुरादेश ।
169. C. वश्यतेसैन for the last expression.
170. I. समं, C. पूर्व for सर्व suggested by J. and the other Mss.
Colophon :—I त्रयस्त्रिंशा for द्वात्रिंशत् suggested by J. and the context.