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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

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CRITICAL NOTES : CHAPTER XXXII 183
116. J. विस्तृतम् for विस्तरम् ।
117. (1) I. .........करिकर्णे, J. उवाब्जकर्णिका, C. पुपाब्जकंठकां ।
(2) I. omits तत् ।
119. C. यन्मना ।
121. C. द्वारशालां for द्वारदेवान् ।
122. (1) I. बसना, J. चरुडरा which is also suggested by the next
line. (2) C. वामेप्रि(प्र) चंडसंयुक्तं, which is the first pāda of the next line.
123. C. omits the second pāda.
127. C. दियत्, B. दिनौपदं for दिवस्पति ।
128. (1) B. पश्चिमांतकं । (2) C. द्वारपालकं, B. द्वारमुच्यते, for द्वारपञ्चके ।
129. (1) ................ बहिः for द्वारशाखामुदितं suggested by J. and the other
Mss. (2) C