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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 856 में से

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पृष्ठ 57

: "सौम्यदिकद्विपदे" or "सौम्यदिक्द्विपदे"?
"सौम्यदिकद्विपदे" - there is an 'इ' matra on 'क': द, ि, क! सौम्यदिकद्विपदे.
Line 18:
"तथोत्तरे महेन्द्रस्य द्विपदं दक्षिणे तथा ॥ ४९ ॥"
Line 19:
"सत्यस्य द्विपद तस्य दक्षिणे द्वयं भृशम्(स्य) ।"
Wait, "द्वयं" or "पदं"?
Look at line 19:
"सत्यस्य द्विपद तस्य दक्षिणे द्वयं भृशम्(स्य) ।"
Wait, is it "द्वयं"?
द्, व, य, ं -> yes, "द्वयं"!
Line 20:
"दक्षिणे मध्यसूत्रस्य पूर्वे च द्विपदे यमः ॥ ५० ॥"
Line 21:
"तत्पूर्वे द्विपदे स्थित्वा (स्थाप्यं) राक्षसं चैव पश्चिमे ।"
Line 22:
"गन्धर्वे (र्वे) द्विपदे स्थाप्यं भृश(वस्य) [तद्]द्विपदं भवेत् ॥ ५१ ॥"
Wait, let's look at the first word of line 22 again:
"गन्धर्वे ( र्बं )" or "गन्धर्वे ( र्वं )"?

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