मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
पृष्ठ 567, कुल 856 में से
संदर्भ में पढ़ेंCRITICAL NOTES : CHAPTER VI 23
83. J. omits this line. B. प्रसारयेत् and after this B. adds एवं कृते फलं
वास्तु सुखार्थं स्यात् समुद्भवः। इति श(शं)कुस्थापनप्राचीन लक्षं, and then omits
the next eight lines.
84. (1) A. F. पैशान्य। (2) J. अथो for यथो।
85. J. विन्धो for बिन्दो।
86. (1) J. विन्धो for बिन्दो। (2) J. ईशान्य for ईश। (3) J. सूत्रयेत् for
सूत्रयेत्।
87. J. यार्तिकामस्यकारेण, A. C. F. मुक्तिकामं ङकारेण।
88. (1) J. प्राचि। (2) J. संमतम्, I. धर्मताम्।
89. (1) J. आग्नेयेत्, A. F आग्नये। (2) J. प्राचि।
90. J. वस्तु।
91. A. F. J. सुप्तार्थे for सुगाढं।
92. J. मानणसं, A. F. मानससूत्रादि।
94. (1) A. F. B. समावर्ते। (2) B. त्रिधा for तृतीया। (3) J. वक्तं for वृत्तं in
both the places.
95. J. घटा।
96. (1) I. सूत्रीक, B. सूत्रांत, A. F. सूत्रं तु for सूत्रात् suggested by J. (2)
J. A. F. मिति, B. हि for होति।
97. A. समादि, F. मतस्य वि for इन्द्रादि।
98. J. इन्द्रादि चाग्नि।
99. (1) A. B. F. J. सौम्या दिवा। (2) J. युगान्तकम्, which seems better
than the last phrase of the line.
100. J. परिस्तरेत्।
101. A. F. निग्रहे, B. द्विमात्र गृहोवेऽपि।
102. I. मनयेत् for मानयेत्।
103. J. हस्ते माधिकत्वमाम्।
104. एकं for एवं, which seems to be the correct reading.
105. I. कन्यैः for कर्णैः।
106. A. F. निष्टम।
107. A. F. षटुं, B. वखअ शत for चतुःशङ्कं।
108. A. F. अभोर्यकं, B. विध्यंतकं for महार्थकं।
B. omits the next four lines.