सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 856 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 45

ā! Letter 3: 'व'! Letter 4: 'धि'!
Wait, लयावधि or यथाविधि? In MS corruption, often यथाविधि becomes लयावधि! Here the text literally prints: लयावधि ॥ १० ॥!

Line 23:
चतुरश्रं तूपहितो(तं) हस्तमात्रं तु निम्नकम् ।

Line 24:
ह(वा)रिष्वारि परितः समं संचित्य चोच्छ्रयम्(च्छ्रितम्) ॥ ११ ॥
Wait, let's read line 24:
ह(वा)रिष्वारि परितः समं संचित्य चोच्छ्रयम्(च्छ्रितम्) ॥ ११ ॥
Wait, look at ह(वा)रिष्वारि:
ह (ha)
(वा) (vā)
र-ि (ri)
ष-्-व-ा-र-ि (ṣvāri) or ष्वा-पि (ṣvāpi)?
Wait, look at the last syllable: 'रि' or 'पि'? Look at 'र' in 'परितः', it has a curve down. But in ह(वा)रिष्वा...: it has 'रि'! Wait, or ह(वा)रिष्वारि?
Wait, what about the next words:
`परितः समं संचित्य चोच्छ्रयम्(च्छ