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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 389, कुल 856 में से

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पृष्ठ 389

कृतिस्तथाorधारा(धर्मन्धा)कृतिस्तथाorधारा(र्धमन्धा)कृतिस्तथा? Let's look closely at the first glyph inside the parenthesis: It has a repha on top of 'ध' (or 'व'?). Wait, look at 'र्ध' in 'सार्ध': that's how 'र्ध' is written. So it is (र्धमन्धा)or(धर्मन्धा)- wait,र्धमन्धाhas repha on the first letter! Yes,(र्धमन्धा)`.

Line 56:
कुर्यात्तु(क्रियेत) शिल्पिभिः सर्वैः सर्वसंपत्करं सदा ॥ २८ ॥ 56
Look at (क्रियेत):
क + ् + र + ि = क्रि
य + े = ये
त = त
So (क्रियेत). Perfect!

Line 51:
विपरीते भूसुरादीनां विपत्त्य(त्तिं) हि समावहेत् ।
Look at विपत्त्य(त्तिं):
व + ि = वि
प = प
त् + त + ् + य = त्त्य
(
त् + त + ि + ं = त्तिं
)
So विपत्त्य(त्तिं). Perfect!

Let's double-check all line numbers