महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)
Mahanirvana Tantra with Hindi Translation
शिव-पार्वती संवाद द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर · कल्याण मन्दिर · 1950 (उद्गम)
प्रकाशक
प्रकाशक
पण्डित देवीदत्त शुक्ल स्मारक
परा-वाणी आध्यात्मिक शोध-संस्थान
कल्याण मन्दिर प्रकाशन
श्रीचण्डी-धाम, प्रयाग-राज-२११००६ ☎ ९४५०२२२७६७
(हिन्दी)
महा-निर्वाण तन्त्र
हे शिवे! तुम साक्षात् परम ब्रह्म की परमा प्रकृति अर्थात् शक्ति हो।
यह सारा जगत् तुम्हीं से उत्पन्न हुआ है।
हे भद्रे! महत् तत्त्व से परमाणु तक और स्थूल-सूक्ष्म
सारा स्थावर जङ्गम-स्वरूप जगत् तुम्हारे ही द्वारा उत्पन्न हुआ है।
सारा जगत् तुम्हारे अधीन है।
तुम सबकी आद्या अर्थात् आदि-भूता हो।
सारी विद्याएँ और हम सब तुम्हीं से उत्पन्न हुए हैं।
सारे जगत् के सभी विषयों को तुम जानती हो।
तुम्हें कोई नहीं जान सकता।
(पृष्ठ १६)
तृतीय संस्करण
चैत्र शुक्लाष्टमी, क्रोधी सं० २०६८ वि०
(११ अप्रैल, २०११)
सर्वाधिकार सुरक्षित
परा-वाणी प्रेस
'श्रीचण्डी-धाम', अलोपी-देवी मार्ग, प्रयाग-राज (उ०प्र०)
अनुक्रमणिका
महा-निर्वाण-तन्त्रोक्त पूजन-यन्त्र चार
प्राक्कथन : 'महा-निर्वाण तन्त्र' का महत्त्व पाँच
पहला उल्लास : जीव-निस्तारोपाय-सम्बन्धी प्रश्न १
दूसरा उल्लास : जीव-निस्तारोपाय का कथन ४
तीसरा उल्लास : ब्रह्मोपासना-विधि ७
चौथा उल्लास : प्रकृति-साधना का उपक्रम १५
पाँचवाँ उल्लास : कलश-स्थापन और तत्त्व-संस्कार २०
छठा उल्लास : पात्र-स्थापन और होम, चक्र, करणादि ३३
सातवाँ उल्लास : स्तोत्र, कवच और कुल-तत्त्व के लक्षणों का कथन ४३
आठवाँ उल्लास : वर्णाश्रम-आचार-धर्म का कथन ५०
नवाँ उल्लास : दस प्रकार के संस्कार ६३
दसवाँ उल्लास : वृद्धि-श्राद्धादि का कथन ७९
ग्यारहवाँ उल्लास : पापों के प्रायश्चित्त का वर्णन ८९
बारहवाँ उल्लास : सनातन व्यवहार का कथन ९६
तेरहवाँ उल्लास : देवता, जलाशयादि-प्रतिष्ठा एवं वास्तु-यागादि की विधि १०४
चौदहवाँ उल्लास : शिव-लिङ्ग-स्थापन एवं चतुर्विध अवधूतों का विवरण ११६
परिशिष्ट : 'महा-निर्वाण तन्त्र' के अनूठे उद्धरण १२६
★★★
(तीन)
महा-निर्वाण-तन्त्रोक्त पूजन-यन्त्र
सामान्यार्घ्य-स्थापन-यन्त्र श्री आद्या-पूजन-यन्त्र
ह्रीं ह्रीं
पाँचवाँ उल्लास, १६० पाँचवाँ उल्लास, १७२-७३
कलश-स्थापन-यन्त्र विशेषार्घ्य (श्रीपात्र) स्थापन-यन्त्र
२ ३
ह्रीं
१ ४
पाँचवाँ उल्लास, १८२ छठा उल्लास, २१
(चार)