महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2170, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंसवित्रीज्ञाः क्रियावन्तस्ते श्राद्धे सत्कृतिक्षमाः ॥
परंतु जो ब्राह्मण व्रतका आचरण करनेवाले, गुणवान्, सदा स्वाध्यायपरायण, गायत्रीमन्त्रके ज्ञाता और क्रियानिष्ठ हों, वे श्राद्धमें सत्कारके योग्य माने गये हैं ॥
श्राद्धस्य ब्राह्मणः कालः प्राप्तं दधि घृतं तथा ।
दर्भाः सुमनसः क्षेत्रं तत्काले श्राद्धदो भवेत् ॥
श्राद्धका सबसे उत्तम काल है सुपात्र ब्राह्मणका मिलना। जिस समय भी ब्राह्मण, दही, घी, कुशा, फूल और उत्तम क्षेत्र प्राप्त हो जायँ, उसी समय श्राद्धका दान आस्मभ कर देना चाहिये ॥
चारित्रनिरता राजन् कृशा ये कृशवृत्तयः ।
तपस्विनश्च ये विप्रास्तथा भैक्षचराश्च ये ॥
अर्थिनः केचिदिच्छन्ति तेषां दत्तं महत् फलम् ।
राजन्! जो ब्राह्मण सदाचारी, थोड़ी-सी आजीविका-पर गुजारा करनेवाले, दुर्बल, तपस्वी और भिक्षासे निर्वाह करनेवाले हों, वे यदि याचक होकर कुछ माँगने आवें तो उन्हें दिये हुए दानका महान् फल होता है ॥
एवं धर्मभृतां श्रेष्ठ ज्ञात्वा सर्वात्मना तदा ।
श्रोत्रियाय दरिद्राय प्रयच्छानुपकारिणे ॥
धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ युधिष्ठिर! इन सब बातोंको पूर्णरूपसे जानकर धनहीन और अपना उपकार न करनेवाले वेदवेत्ता ब्राह्मणको दान करो ॥
दानं यत् ते प्रियं किंचिच्छ्रोत्रियाणां च यत् प्रियम् ।
तत् प्रयच्छस्व धर्मज्ञ यदिच्छसि तदक्षयम् ॥
धर्मज्ञ! यदि तुम अपने दानको अक्षय बनाना चाहते हो तो जो दान तुम्हें प्रिय लगता हो तथा जिसे वेदवेत्ता ब्राह्मण पसंद करते हों, वही दान करो ॥
निरयं ये च गच्छन्ति तच्छृणुष्व युधिष्ठिर ॥
युधिष्ठिर! अब नरकमें जानेवाले पुरुषोंका वर्णन सुनो ॥
परदारापहर्तारः परदाराभिमर्शकाः ।
परदारप्रयोक्तारस्ते वै निरयगामिनः ॥
जो परायी स्त्रीका अपहरण करते हैं, परस्त्रीके साथ व्यभिचार करते हैं और दूसरोंकी स्त्रियोंको दूसरे पुरुषोंसे मिलाया करते हैं, वे भी नरकमें पड़ते हैं ॥
सूचकाः संधिभेत्तारः परद्रव्योपजीविनः ।
वर्णाश्रमाणां ये बाह्याः पाखण्डाश्चैव पापिनः ।
उपासते च तानेव ते सर्वे नरकालयाः ॥
चुगलखोर, सुलहकी शर्त तोड़नेवाले, पराये धनसे जीविका चलानेवाले, वर्ण और आश्रमसे विरुद्ध आचरण करनेवाले, पाखण्डी, पापाचारी तथा जो उनकी सेवा करते हैं, वे