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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 2831, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 2831

निष्पाप नरेश! जब शमीके गर्भमें छिप जानेके कारण कहीं अग्निदेवका दर्शन नहीं हो रहा था और सम्पूर्ण जगत्के प्रकाश अथवा दृष्टिशक्तिके विनाशकी घड़ी उपस्थित हो गयी, तब सब देवता सर्वलोक-पितामह ब्रह्माजीकी सेवामें उपस्थित हुए और बोले—‘प्रभो! भगवान् अग्निदेव अदृश्य हो गये हैं। इसका क्या कारण है, यह हमारी समझमें नहीं आता। सम्पूर्ण भूतोंका विनाश न हो जाय, इसके लिये अग्निदेवको प्रकट कीजिये’ ॥ १४-१५ १/२ ॥

जनमेजय उवाच

किमर्थं भगवानग्निः प्रणष्टो लोकभावनः ॥ १६ ॥
विज्ञातश्च कथं देवैस्तन्ममाचक्ष्व तत्त्वतः ।
जनमेजयने पूछा—ब्रह्मन्! लोकभावन भगवान् अग्नि क्यों अदृश्य हो गये थे और देवताओंने कैसे उनका पता लगाया? यह यथार्थरूपसे बताइये ॥ १६ १/२ ॥

वैशम्पायन उवाच

भृगोः शापाद् भृशं भीतो जातवेदाः प्रतापवान् ॥ १७ ॥
शमीगर्भमथासाद्य ननाश भगवांस्ततः ।
वैशम्पायनजीने कहा—राजन्! एक समयकी बात है कि प्रतापी भगवान् अग्निदेव महर्षि भृगुके शापसे अत्यन्त भयभीत हो शमीके भीतर जाकर अदृश्य हो गये ॥ १७ १/२ ॥
प्रणष्टे तु तदा वह्नौ देवाः सर्वे सवासवाः ॥ १८ ॥
अन्वैषन्त तदा नष्टं ज्वलनं भृशदुःखिताः ।
उस समय अग्निदेवके दिखायी न देनेपर इन्द्रसहित सम्पूर्ण देवता बहुत दुःखी हो उनकी खोज करने लगे ॥
ततोऽग्नितीर्थमासाद्य शमीगर्भस्थमेव हि ॥ १९ ॥
ददृशुर्ज्वलनं तत्र वसमानं यथाविधि ।
तत्पश्चात् अग्नितीर्थमें आकर देवताओंने अग्निको शमीके गर्भमें विधिपूर्वक निवास करते देखा ॥ १९ १/२ ॥
देवाः सर्वे नरव्याघ्र बृहस्पतिपुरोगमाः ॥ २० ॥
ज्वलनं तं समासाद्य प्रीताभूवन् सवासवाः ।
नरव्याघ्र! इन्द्रसहित सब देवता बृहस्पतिको आगे करके अग्निदेवके समीप आये और उन्हें देखकर बड़े प्रसन्न हुए ॥ २० १/२ ॥
पुनर्यथागतं जग्मुः सर्वभक्षश्च सोऽभवत् ॥ २१ ॥
भृगोः शापान्महाभाग यदुक्तं ब्रह्मवादिना ।
महाभाग! फिर वे जैसे आये थे, वैसे लौट गये और अग्निदेव महर्षि भृगुके शापसे सर्वभक्षी हो गये। उन ब्रह्मवादी मुनिने जैसा कहा था, वैसा ही हुआ ॥

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