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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1926, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 1926

तेषां पदाता नागानां पादरक्षाः समन्ततः ।
पट्टिशासिधराः शूराश्चापबाणभुशुण्डिनः ॥
भिन्दिपालधराश्चैव शूलहस्ताः सुचक्रिणः ।
तेषां समागमो घोरो देवासुररणोपमः ॥)
उनमें शूरवीर पैदल सैनिक चारों ओरसे पट्टिश, खड्ग, धनुष-बाण, भुशुण्डी, भिन्दिपाल, त्रिशूल और चक्र हाथमें लेकर हाथियोंके पैरोंकी रक्षा कर रहे थे। उनमें देवासुर-संग्रामके समान भयंकर युद्ध छिड़ गया।

धृतराष्ट्र उवाच

कथं संजय राधेयः प्रत्यव्यूहत पाण्डवान् ।
धृष्टद्युम्नमुखान् सर्वान् भीमसेनाभिरक्षितान् ॥ ५ ॥
सर्वानैव महेष्वासानजय्यानमरैरपि ।
के च प्रपक्षौ पक्षौ वा मम सैन्यस्य संजय ॥ ६ ॥
धृतराष्ट्रने पूछा—संजय! राधापुत्र कर्णने देवताओंके लिये भी अजेय तथा भीमसेनद्वारा सुरक्षित धृष्टद्युम्न आदि सम्पूर्ण महाधनुर्धर पाण्डव-वीरोंके जवाबमें किस प्रकार व्यूहका निर्माण किया? संजय! मेरी सेनाके दोनों पक्ष और प्रपक्षके रूपमें कौन-कौनसे वीर थे? ॥ ५-६ ॥
प्रविभज्य यथान्यायं कथं वा समवस्थिताः ।
कथं पाण्डुसुताश्चापि प्रत्यव्यूहन्त मामकान् ॥ ७ ॥
वे किस प्रकार यथोचित रूपसे योद्धाओंका विभाजन करके खड़े हुए थे? पाण्डवोंने भी मेरे पुत्रोंके मुकाबलेमें कैसे व्यूहका निर्माण किया था? ॥ ७ ॥
कथं चैव महद् युद्धं प्रावर्तत सुदारुणम् ।
क्व च बीभत्सुरभवद् यत् कर्णोऽयाद् युधिष्ठिरम् ॥ ८ ॥
यह अत्यन्त भयंकर महायुद्ध किस प्रकार आरम्भ हुआ? अर्जुन कहाँ थे कि कर्णने युधिष्ठिरपर आक्रमण कर दिया? ॥ ८ ॥
को ह्यर्जुनस्य सान्निध्ये शक्तोऽभ्येतुं युधिष्ठिरम् ।
सर्वभूतानि यो ह्येकः खाण्डवे जितवान् पुरा ।
कस्तमन्यस्तु राधेयात् प्रतियुध्येज्जिजीविषुः ॥ ९ ॥
जिन्होंने पूर्वकालमें अकेले ही खाण्डववनमें समस्त प्राणियोंको परास्त कर दिया था, उन अर्जुनके समीप रहते हुए युधिष्ठिरपर कौन आक्रमण कर सकता था? राधापुत्र कर्णके सिवा दूसरा कौन है जो जीवित रहनेकी इच्छा रखते हुए भी अर्जुनके सामने युद्ध कर सके ॥ ९ ॥

संजय उवाच