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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1925, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 1925

सैनिक बोले— आज यह कर्ण और अर्जुनका महान् युद्ध होगा। आज राजा दुर्योधनके सारे शत्रु मार डाले जायँगे।
अद्य कर्णं रणे दृष्ट्वा फाल्गुनो विद्रविष्यति ।
अद्य तावद् वयं युद्धे कर्णस्यैवानुगामिनः ॥
कर्णबाणमयं भीमं युद्धं द्रक्ष्याम संयुगे ।
आज अर्जुन रणभूमिमें कर्णको देखते ही भाग खड़े होंगे। आज युद्धमें हमलोग कर्णके ही अनुगामी होकर समरांगणमें कर्णके बाणोंसे भरा हुआ भीषण संग्राम देखेंगे।
चिरकालागतमिदमद्येदानीं भविष्यति ॥
अद्य द्रक्ष्याम संग्रामं घोरं देवासुरोपमम् ।
दीर्घकालसे जिसकी सम्भावना की जाती थी, वह आज इसी समय उपस्थित होगा। आज हमलोग देवासुर-संग्रामके समान भयंकर युद्ध देखेंगे।
अद्येदानीं महद् युद्धं भविष्यति भयानकम् ॥
अद्येदानीं जयो नित्यमेकस्यैकस्य वा रणे ।
आज अभी बड़ा भयानक युद्ध छिड़नेवाला है। आज रणभूमिमें इन दोनोंमेंसे एक-न-एककी विजय अवश्य होगी।
अर्जुनं किल राधेयो वधिष्यति महारणे ॥
अथवा कं नरं लोके न स्पृशन्ति मनोरथाः ।
निश्चय ही राधापुत्र कर्ण इस महायुद्धमें अर्जुनका वध कर डालेगा अथवा इस जगत्में किस मनुष्यके अंदर बड़े-बड़े मनसूबे नहीं उठते हैं।

संजय उवाच

इत्युक्त्वा विविधा वाचः कुरवः कुरुनन्दन ।
आजघ्नुः पटहांश्चैव तूर्यांश्चैव सहस्रशः ॥
संजय कहते हैं— कुरुनन्दन! इस तरह नाना प्रकारकी बातें कहकर कौरवोंने सहस्रों नगाड़े पीटे और दूसरे-दूसरे बाजे भी बजवाये।
भेरीनादांश्च विविधान् सिंहनादांश्च पुष्कलान् ।
मुरजानां महाशब्दानानाकानां महारवान् ॥
भाँति-भाँतिकी भेरी-ध्वनि हुई और बारंबार सैनिकोंद्वारा सिंहनाद किये गये। गम्भीर ध्वनि करनेवाले ढोल और मृदंगके महान् शब्द वहाँ सब ओर गूँजने लगे।
नृत्यमानाश्च बहवस्तर्जमानाश्च मारिष ।
अन्योन्यमभ्ययुर्युद्धे युद्धरङ्गगता नराः ॥
मान्यवर नरेश! युद्धके रंगभूमिमें उतरे हुए बहुसंख्यक मनुष्य नृत्य तथा गर्जन-तर्जन करते हुए एक-दूसरेका सामना करनेके लिये आगे बढ़े।